देश की खबरें | केंद्र ने झारखंड को कुष्ठ राोगियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य मुहैया कराने के लिए चुना

रांची, 13 जनवरी केंद्र ने झारखंड को कुष्ठ रोगियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य मुहैया कराने के मकसद से प्रायोगिक एकीकृत कार्यक्रम के तहत चुना है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में अवर महानिदेशक अनिल कुमार ने बताया कि इसके लिए दो राष्ट्रीय पहल राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (एनएलईपी) और राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम को एकीकृत किया गया है और ‘कुष्ठ रोगियों के लिए एकीकृत मानसिक स्वास्थ्य सेवा’ संबंधी दो दिवसीय कार्यशाला यहां आयोजित की गई।

उन्होंने बताया कि 12 राज्यों के कुष्ठ उन्मूलन विभाग के अधिकारियों ने इस कार्यशाला में हिस्सा लिया।

कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘‘हमने झारखंड को दो वजह से चुना। पहला राज्य में कुष्ठ रोग की दर अधिक है और दूसरा रांची स्थित प्रतिष्ठित केंद्रीय मनोरोग संस्थान मौजूद है। धीरे-धीरे इस कार्यक्रम का विस्तार देश के अन्य राज्यों में भी किया जाएगा।

झारखंड के एनएलईपी आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय औसत 0.45 प्रतिशत के मुताबिक राज्य में कुछ दर 1.8 प्रतिशत है। इसके मुताबिक राज्य में वर्ष 2021-22 में कुष्ठ के 4025 मामले आए जबकि 2020-21 में यह संख्या 3450 थी।

कुमार ने कहा कि कुष्ठ का इलाज हो सकता है लेकिन इससे जुड़ी धारणाओं की वजह से मरीजों में अवसाद और व्याकुलता देखने को मिलती है। उन्होंने बताया, ‘‘कुष्ठ के 33 प्रतिशत मरीज अवसाद से भी ग्रस्त हैं जबकि 19 प्रतिशत में व्याकुलता का भाव है।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)