देश की खबरें | केंद्र ने 2014 से बच्चों के विकास की उपेक्षा की: भारत की खराब जीएचआई रैंकिंग पर राकांपा ने कहा
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मुंबई, 15 अक्टूबर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने शनिवार को आरोप लगाया कि वैश्विक भूख सूचकांक (जीएचआई)-2022 में भारत की ताजा रैंकिग इशारा करती है कि केंद्र सरकार ने पिछले आठ साल में बच्चों के विकास को नजरअंदाज किया।
जीएचआई-2022 के तहत 121 देशों की सूची तैयार की गई जिसमें भारत 107वें नंबर पर है, जबकि देश में ‘चाइल्ड-वेस्टिंग’ (बच्चों में लंबाई के हिसाब से कम वजन) दर 19.3 फीसदी के साथ दुनियाभर में सर्वाधिक है।
स्तब्ध करने वाली बात यह है कि एशिया में भारत से पीछे रहने वाला एक मात्र देश अफगानिस्तान है, जबकि पाकिस्तान (99), बांग्लादेश (84), नेपाल (81) और श्रीलंका (64) की स्थिति भारत से बेहतर है।
वर्ष 2021 में भारत 116 देशों में 101वें स्थान पर था, जबकि 2020 में 94वें स्थान पर था।
राकांपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रेस्टो ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर जवाब देना चाहिए।
क्रेस्टो ने कहा, ‘‘वर्ष 2014 में जीएचआई रैंक 55 थी, जो वर्ष 2022 में 107 हो गई। इसका मतलब है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार और इसका महिला एवं बाल विकास मंत्रालय देश के बच्चों की देखभाल करने में नाकाम रहा।’’
उन्होंने पीटीआई- से कहा कि भारत की स्थिति अफगानिस्तान को छोड़कर एशिया में सबसे बदतर है, जो दिखाती है कि सरकार ने पिछले आठ साल में बच्चों के विकास की उपेक्षा की है।
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