देश की खबरें | हिमालय क्षेत्र की दबाव सहन करने की क्षमता के आकलन से जुड़ी याचिका पर केंद्र को और चार हफ्ते मिले

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नयी दिल्ली, 10 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैले भारतीय हिमालय क्षेत्र के ‘जनसंख्या का दबाव सहन कर सकने की क्षमता’ एवं ‘मास्टर प्लान’ का आकलन करने का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर सोमवार को केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने के लिए और चार हफ्तों का वक्त दिया।

प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलील का संज्ञान लिया, जिन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा था।

जनसंख्या का दबाव सहन कर सकने की क्षमता, आबादी का वह अधिकतम आकार है जिसे पारिस्थितिकी तंत्र खुद को नुकसान पहुंचाये बगैर बनाये रख सकता है।

इससे पहले, पीठ ने 17 फरवरी को सरकार को नोटिस जारी किया था।

शीर्ष न्यायालय अशोक कुमार राघव नाम के एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिन्होंने भारतीय हिमालय क्षेत्र के जनसंख्या का दबाव सहन कर सकने की क्षमता और मास्टर प्लान का आकलन करने का अनुरोध किया है।

अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ के मार्फत दायर की गई याचिका में कहा गया है, ‘‘जनसंख्या का दबाव सहन कर सकने की क्षमता का अध्ययन नहीं किये जाने के चलते, भूस्खलन, जमीन धंसने, भूमि में दरार पड़ने जैसे गंभीर भूगर्भीय खतरे पैदा हो रहे हैं, जैसा कि जोशीमठ (उत्तराखंड) में देखने को मिल रहा है। साथ ही, पर्वतीय क्षेत्रों में गंभीर पारिस्थितिकीय एवं पर्यावरणीय विनाश हो रहा है।’’

याचिका में कहा गया है, ‘‘हिमाचल प्रदेश में धौलाधर सर्किट, सतलुज सर्किट, ब्यास सर्किट और ट्राइबल सर्किट में फैले लगभग सभी हिल स्टेशन, तीर्थ स्थल और अन्य पर्यटन स्थल भी जनसंख्या के अधिक दबाव का सामना कर रहे हैं तथा राज्य में इनमें से किसी भी स्थान पर जनसंख्या के दबाव सहन कर सकने की क्षमता का आकलन नहीं किये जाने के चलते वे लगभग ढहने के कगार पर हैं।’’

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