नयी दिल्ली, चार अप्रैल औद्योगिक अल्कोहल को विनियमित करने के अपने अधिकार का दावा करते हुए, केंद्र ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि मानव उपभोग के प्रतिकूल एवं औद्योगिक इस्तेमाल के लिए निर्मित अल्कोहल पर उत्पाद शुल्क लगाने की विधायी शक्ति पूरी तरह से संसद के पास है।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली नौ-सदस्यीय संविधान पीठ औद्योगिक अल्कोहल के उत्पादन, विनिर्माण, आपूर्ति और विनियमन में केंद्र और राज्यों की शक्तियों के अतिव्यापी मुद्दे की सुनवाई कर रही है।
संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय, न्यायमूर्ति अभय एस. ओका, न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना, न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह शामिल हैं।
संविधान पीठ के समक्ष बहस करते हुए, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि मानव उपभोग के लिए उपयुक्त अल्कोहल और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त अल्कोहल को अलग-अलग माने जाने के संबंध में एक ‘‘विवेकपूर्ण निर्णय’’ लिया गया था और पहला प्रांतीय विधायिका के दायरे में आता है और दूसरा संघीय विधायिका के दायरे में आता है।
वेंकटरमणी ने पीठ से कहा, ‘‘नहीं पीने योग्य शराब पर उत्पाद शुल्क लगाने के संबंध में विधायी शक्ति विशेष रूप से संसद के पास है, और पीने योग्य शराब पर विशेष रूप से राज्यों के विधानमंडलों के पास है।’’
सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा राज्यों के खिलाफ फैसला सुनाए जाने के बाद पीठ के समक्ष बड़ी संख्या में याचिकाएं दायर की गई।
वर्ष 1997 में सात-सदस्यीय संविधान पीठ के राज्यों के विरुद्ध फैसला सुनाए जाने के बाद शीर्ष अदालत के समक्ष बड़ी संख्या में याचिकाएं दायर की गयी थीं और 2010 में यह मामला नौ-सदस्यीय संविधान पीठ के सुपुर्द कर दिया गया था।
मामले की सुनवाई अधूरी रही और यह मंगलवार को जारी रहेगी जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता इस मामले पर दलील रखेंगे।
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी ने बुधवार को संविधान पीठ से कहा था कि ‘‘शराब’’ हमेशा राज्यों के विधायी क्षेत्राधिकार में रही है और केंद्र के पास औद्योगिक शराब के संबंध में कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
उन्होंने कहा था कि औद्योगिक शराब सहित आबकारी, शराब और स्पिरिट हमेशा राज्य के अधिकार क्षेत्र का हिस्सा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता ने कहा था कि अल्कोहल वाले सभी तरल पदार्थ नशीली शराब की श्रेणी के होते हैं और सातवीं अनुसूची की सूची-दो की प्रविष्टि-आठ के अंतर्गत आते हैं, जिसके अंतर्गत शीरा से तैयार होने वाले सभी प्रकार की स्पिरिट को नियंत्रित एवं विनियमित करने का विशेष क्षेत्राधिकार राज्यों के पास होता है।
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