देश की खबरें | केंद्र सरकार पहले यह बताए कि 2,000 रुपये का नोट लाया क्यों गया था : दिग्विजय सिंह
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 2,000 रुपये के नोट को चलन से वापस लेने की घोषणा के चार दिन बाद कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि 2,000 रुपये का नोट पेश क्यों किया गया था?
इंदौर (मध्य प्रदेश), 23 मई भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा 2,000 रुपये के नोट को चलन से वापस लेने की घोषणा के चार दिन बाद कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने मंगलवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि 2,000 रुपये का नोट पेश क्यों किया गया था?
इस मूल्य वर्ग के नोट को चलन से वापस लिए जाने के फैसले के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘पहले वे (केंद्र सरकार) यह बताएं कि यह नोट लाए क्यों थे?’’
मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार ने इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा फैसला करते हुए मंगलवार को ही घोषणा की है कि राज्य में 31 दिसंबर 2022 तक विकसित सभी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित किया जाएगा।
सूबे के मुख्यमंत्री रहे सिंह ने इस घोषणा को बेमानी करार दिया और कहा, ‘‘ऐसी घोषणा तो वे (राज्य की भाजपा सरकार) हजार बार कर चुके हैं। अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की अधिसूचना कहां है?’’
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शिवपुरी में एक हालिया कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं से आत्मीयता जताते हुए कहा था कि उनका दिल स्थानीय लोगों के लिए धड़कता है। इस दौरान उन्होंने हाथ जोड़कर यह भी कहा था कि उनसे जो गलतियां हुई हों, वह उनके लिए माफी चाहते हैं। सिंधिया के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब प्रसारित हुआ है।
सिंह ने सिंधिया पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘अच्छा है कि वह अपनी गलतियां महसूस कर इनके लिए क्षमा मांग रहे हैं।’’
गौरतलब है कि सिंधिया की सरपरस्ती में कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के विधानसभा से त्यागपत्र देकर भाजपा में शामिल होने के कारण 20 मार्च 2020 को तत्कालीन कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा 23 मार्च 2020 को सूबे की सत्ता में लौट आई थी।
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