लॉकडाउन में प्रवासी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी की मांग पर केंद्र विचार करे : न्यायालय
न्यायमूर्ति एनवी रमना, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बीआर गवई की एक पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस याचिका की सुनवाई की। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ताओं हर्ष मंदर और अंजली भारद्वाज ने दायर की है।
नयी दिल्ली, 21 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र से कहा कि वह उस जनहित याचिका की सामग्री पर विचार करे जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि कोरोना वायरस के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के दौरान सभी प्रवासी श्रमिकों को न्यूनतम वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
न्यायमूर्ति एनवी रमना, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बीआर गवई की एक पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस याचिका की सुनवाई की। यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ताओं हर्ष मंदर और अंजली भारद्वाज ने दायर की है।
इस जनहित याचिका में प्रवासी कामगारों के लिए जीने का मौलिक अधिकार लागू करने और उन्हें मजदूरी का भुगतान करने का अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि प्रवासी श्रमिकों को कथित तौर पर लॉकडाउन के बाद काम या भोजन के बिना छोड़ दिया गया है।
पीठ ने कार्यकर्ताओं की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण की दलीलों पर गौर किया और कहा, ‘‘हम प्रतिवादी- केद्र सरकार से इस तरह की सामग्री पर गौर करने और ऐसे कदम उठाने के लिए कहते हैं क्योंकि याचिका में उठाए गए मुद्दों का हल उचित है।’’
इसके साथ ही पीठ ने याचिका का निस्तारण कर दिया।
भूषण ने आरोप लगाया कि सरकारी उपायों के बावजूद हजारों श्रमिकों के पास अब भी बुनियादी सुविधाएं नहीं है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 21, 2020 11:27 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

