जरुरी जानकारी | खेती के मशीनीकरण करने के लिए केन्द्र ने राज्यों को 553 करोड़ रुपये जारी किये

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. केंद्र ने कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ावा देने की योजना के तहत राज्यों को 553 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

नयी दिल्ली, आठ अगस्त केंद्र ने कृषि क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ावा देने की योजना के तहत राज्यों को 553 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

कृषि मशीनीकरण पर उप-मिशन (एसएमएएम) अप्रैल 2014 में शुरू किया गया था जिसका उद्देश्य उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए कृषि मशीनीकरण की समावेशी विकास करना था।

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एक सरकारी बयान में कहा गया, ‘‘वर्ष 2020-21 में, इस योजना के लिए 1,033 करोड़ रुपये का बजट प्रदान किया गया है, जिसमें से 553 करोड़ रुपये राज्य सरकारों को जारी किए गए हैं।’’

कृषि मशीनीकरण समय पर खेत को तैयार करने के कामकाज को समय में निपटाने और इसमें लगने वाले समय में कटौती करने के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने में मदद करता है और लागतों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करता है।

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मशीनीकरण प्राकृतिक संसाधनों की उत्पादकता को भी बढ़ाता है और विभिन्न कृषि कार्यों से बुरी प्रथाओं को कम करता है।

कृषि मंत्रालय ने बताया कि धान के पुआल को जलाना देश के उत्तरी क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं में से एक है।

फसल अवशेष जलाने की प्रथा से इस क्षेत्र के किसानों को रोकने के उद्देश्य से, फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) की योजना वर्ष 2018 में शुरू की गई थी, जिसमें किसानों को ‘सीएचसी’ (कस्टम हायरिंग सेंटर) की स्थापना के माध्यम से फसल अवशेषों के उसी स्थान पर प्रबंधन करने के लिए मशीनरी प्रदान की जाती है।

अलग-अलग किसानों को मशीनरी की खरीद के लिए सब्सिडी भी प्रदान की जाती है। इसके तहत वर्ष 2018-19 और वर्ष 2019-20 में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को कुल 1,178.47 करोड़ रुपये प्रदान किए गए।

बयान में कहा गया है, "वर्ष 2020-21 में, इस योजना के लिए बजट में 600 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं और 548.20 करोड़ रुपये समय से पहले राज्यों को जारी कर दिये गए हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे इस काम को पहले से पूरा करने के लिए तैयार हों।"

कृषि मंत्रालय ने एक बहुभाषी मोबाइल ऐप, 'सीएचसी- फार्म मशीनरी' भी विकसित किया है, जो किसानों को उनके इलाके में स्थित कस्टम हायरिंग सर्विस सेंटरों से जोड़ता है।

यह ऐप छोटे और सीमांत किसानों को खेती के कामकाज के लिए किराये के आधार पर मशीनें लेने के लिए प्रोत्साहित करके देश में कृषि मशीनीकरण की सुविधा प्रदान कर रहा है, ताकि उन्हें ऐसी उच्च कीमत वाली मशीनों की खरीद न करनी पड़े।

ऐप को और संशोधित किया गया है।

बयान में कहा गया है कि संशोधित संस्करण अधिक उपयोगकर्ता के अनुकूल है और ऐप का दायरा भी बढ़ाया गया है।

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