देश की खबरें | ‘लॉबिस्ट’ भंडारी के खिलाफ मामले में ब्रिटेन,यूएई, दक्षिण कोरिया को न्यायिक अनुरोध भेजेगी सीबीआई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) गुजरात में ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड (ओपीएएल) के एक संयंत्र से जुड़े अनुबंध को प्रभावित करने के आरोपी एवं ‘लॉबिस्ट’ संजय भंडारी के खिलाफ रिश्वतखोरी के एक मामले में ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और दक्षिण कोरिया को न्यायिक अनुरोध भेजेगा। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

नयी दिल्ली, चार जुलाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) गुजरात में ओएनजीसी पेट्रो एडिशंस लिमिटेड (ओपीएएल) के एक संयंत्र से जुड़े अनुबंध को प्रभावित करने के आरोपी एवं ‘लॉबिस्ट’ संजय भंडारी के खिलाफ रिश्वतखोरी के एक मामले में ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और दक्षिण कोरिया को न्यायिक अनुरोध भेजेगा। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि यह अनुबंध दाहेज स्थित ओपीएएल संयंत्र में ‘डुअल फीड क्रैकर यूनिट’ (डीएफसीयू) की स्थापना के लिए था।

अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने मामले और आरोपी व्यक्तियों तथा कंपनियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए यूएई, ब्रिटेन और दक्षिण कोरिया को न्यायिक अनुरोध जारी करने के वास्ते तीन अर्जियां दायर की हैं।

किसी विदेशी अदालत की सहायता प्राप्त करने के लिए न्यायिक अनुरोध भेजा जाता है।

सीबीआई के अनुसार, डीएफसीयू के लिए निविदा 20 अप्रैल 2007 को जारी की गई थी, जिसमें दो कंपनी समूहों ने भाग लिया था। इनमें एक, जर्मनी की लिंडे और कोरिया के एसईसीएल का समूह था, जबकि दूसरा अमेरिका की शॉ स्टोन और वेबस्टर तथा भारत के लार्सन एंड टूब्रो (एल एंड टी) का समूह था।

इन कंपनी समूहों ने 2008 में अपनी बोली जमा की थीं, जिनमें परियोजना के लिए प्रौद्योगिकी सलाहकार फोस्टर व्हीलर एनर्जी लिमिटेड, ब्रिटेन ने लिंडे समूह के शुद्ध मौजूदा मूल्य (एनपीवी) 4,160 करोड़ रुपये आंके थे, जबकि शॉ स्टोन और वेबस्टर समूह के लिए 3,918 करोड़ रुपये का आकलन किया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि अधिक एनपीवी के कारण अनुबंध लिंडे और एसईसीएल समूह को उनके द्वारा प्रस्ताव की गई 6,744.32 करोड़ रुपये की बोली के आधार पर दिया गया, जबकि शॉ स्टोन एंड वेबस्टर द्वारा इसकी समीक्षा की मांग खारिज कर दी गई।

सीबीआई का आरोप है कि यूएई के सानटेक इंटरनेशनल का निदेशक होने के नाते भंडारी ने 49.99 लाख अमेरिकी डॉलर ‘कंसल्टेंसी’ शुल्क लगाते हुए सैमसंग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड (एसईसीएल) के साथ एक आपराधिक साजिश रची। भंडारी ने कोरियाई कंपनी और ओपीएएल के बीच अनुबंध समझौते में शामिल एक प्रावधान का उल्लंघन करते हुए ऐसा किया।

प्राथमिकी के अनुसार, जांच के दौरान यह पाया गया कि भंडारी और एसईसीएल के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक होंग नाम कूंग के बीच कई ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था। इनमें सानटेक और एसईसीएल के बीच कंसल्टिंग सेवा समझौता भी शामिल था।

अधिकारियों ने बताया कि कथित कंसल्टेंसी शुल्क सानटेक इंटरनेशनल के विदेश स्थित बैंक खातों में प्राप्त किये गये थे।

एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कंसल्टेंसी शुल्क ओपीएएल की इकाई के लिए अनुबंध को एसईसीएल के पक्ष में कराने के लिए सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने में इस्तेमाल किया गया होगा।

अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी ने पाया कि भंडारी ने सानटेक के एक अन्य निदेशक फरहान मोहम्मद असलम के बैंक खाते में कथित तौर पर दो करोड़ रुपये भेजे थे।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now