नयी दिल्ली, छह जून केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बालासोर रेल दुर्घटना मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद जांच अपने हाथ में ले ली है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों को प्रारंभिक जांच में इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के साथ छेड़छाड़ का संकेत मिलने और दुर्घटना के पीछे ‘‘तोड़फोड़’’ की आशंका जताए जाने के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम के जरिए ट्रेन की मौजूदगी का पता लगता है। अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी को मामले की तह तक जाने के लिए रेल सुरक्षा और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि रेलवे के कामकाज के संबंध में उसके पास बहुत कम विशेषज्ञता है।
प्रक्रिया का पालन करते हुए, केंद्रीय एजेंसी ने तीन जून को बालासोर राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) द्वारा भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 337, 338, 304ए (लापरवाही से मौत) और 34 (समान मंशा), और रेलवे अधिनियम की धारा 153 (रेलवे यात्रियों के जीवन को खतरे में डालने वाला कृत्य), 154 और 175 (जीवन को खतरे में डालना) के तहत दर्ज प्राथमिकी को अपने हाथ में ले लिया।
प्रक्रिया के अनुसार, सीबीआई स्थानीय पुलिस के मामले को अपनी प्राथमिकी के रूप में फिर से दर्ज करती है और जांच शुरू करती है। केंद्रीय एजेंसी अपनी जांच के बाद दाखिल आरोपपत्र में प्राथमिकी से आरोप जोड़ या हटा सकती है।
गौरतलब है कि ओडिशा के बालासोर में दो जून को दो यात्री ट्रेन और एक मालगाड़ी के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना में कुल 278 लोगों की जान चली गई थी और 1100 से अधिक लोग घायल हुए थे।
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