देश की खबरें | सीबीआई जांच का निर्देश केवल अपील करने के आधार पर ही नहीं दिया जाना चाहिए: उच्चतम न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि एक कथित अपराध की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराये जाने का निर्देश ‘‘केवल अपील करने के आधार पर’’ ही नहीं दिया जाना चाहिए।

नयी दिल्ली, 14 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि एक कथित अपराध की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराये जाने का निर्देश ‘‘केवल अपील करने के आधार पर’’ ही नहीं दिया जाना चाहिए।

न्यायालय ने कहा कि जांच को स्थानांतरित करने की शक्ति का इस्तेमाल ‘‘संयम’’ से और केवल ‘‘असाधारण परिस्थितियों में’’ किया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला की पीठ ने कहा, ‘‘अब यह स्थापित कानून है कि किसी नागरिक, जो एक आपराधिक मामले में एक वास्तविक शिकायतकर्ता है, के कथित अपराध की जांच सीबीआई से कराये जाने के लिए कहने मात्र से ऐसा नहीं किया जाना चाहिए।’’

पीठ ने अपने 94 पृष्ठों के फैसले में ये टिप्पणियां कीं। पीठ ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें 2009 में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में कथित सुरक्षा बलों द्वारा कुछ आदिवासियों के कथित नरसंहार मामले की जांच सीबीआई से कराये जाने का अनुरोध किया गया था।

पीठ ने पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए इस याचिका को खारिज किया।

पीठ ने कहा कि जब शीर्ष अदालत को लगता है कि पुलिस अधिकारियों द्वारा जांच उचित दिशा में नहीं है और कथित अपराध में उच्च पुलिस अधिकारी शामिल हैं, तो अदालत सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी को जांच सौंपना उचित समझ सकती है।

उसने कहा कि जांच करने के लिए सीबीआई को निर्देश जारी करने के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत संवैधानिक अदालतों की असाधारण शक्ति का प्रयोग ‘‘बड़ी सतर्कता’’ के साथ किया जाना चाहिए जैसा कि शीर्ष अदालत ने अपने पहले के एक फैसले में रेखांकित किया था।

पीठ ने कहा कि यह अच्छी तरह से तय है कि आरोप पत्र दाखिल करने के बाद भी, अदालत को एक उपयुक्त मामले में जांच सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने का अधिकार है।

उच्चतम न्यायालय के पिछले फैसले का जिक्र करते हुए, पीठ ने कहा कि यह दोहराया गया था कि जांच सीबीआई को केवल ‘‘दुर्लभ और असाधारण मामलों’’ में ही स्थानांतरित की जा सकती है।

पीठ ने पिछले एक अन्य फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इस अदालत ने कहा है कि कोई भी इस बात पर जोर नहीं दे सकता है कि किसी विशेष एजेंसी द्वारा अपराध की जांच की जाए।

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