देश की खबरें | सीबीआई ने सीजीएसटी अधीक्षक को रिश्वतखोरी में किया गिरफ्तार, करोड़ों की संपत्ति जब्त

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नयी दिल्ली, 10 जून केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने उत्तर प्रदेश में केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) के एक अधीक्षक को एक निजी कंपनी पर जुर्माना माफ करने के लिए कथित तौर पर एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि सीजीएसटी अधीक्षक निशान सिंह मल्ली की गिरफ्तारी के बाद उसके परिसरों की तलाशी के दौरान सीबीआई ने उसके और उसके परिवार के सदस्यों के नाम पर करोड़ों रुपये मूल्य की 17 संपत्तियों के दस्तावेज जब्त किए।

सीबीआई के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को यहां बताया, ‘‘इन संपत्तियों में गाजियाबाद और मुरादाबाद में तीन आवासीय फ्लैट, मुरादाबाद में एक व्यावसायिक दुकान, रामपुर और गजरौला में 12 आवासीय भूखंड शामिल हैं। आरोपी सरकारी कर्मी के नाम पर एक क्रेटा गाड़ी भी जब्त की गई है।’’

सीबीआई ने बताया कि तलाशी के दौरान कथित रिश्वत राशि तीन लाख रुपये के अलावा तीन लाख रुपये नकद जब्त किये गये।

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘आरोपी लोक सेवक (अधिकारी) के आधिकारिक परिसर की तलाशी के दौरान मामले से संबंधित प्रासंगिक दस्तावेज जब्त किए गए और उनकी जांच की जा रही है।’’

सीबीआई का कहना है कि उसने इस मामले में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया है जो एक कर वकील है तथा मामले में शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहा था।

उसने कहा कि दोनों आरोपियों को गाजियाबाद की एक विशेष अदालत में पेश किया गया, जिसने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

सीजीएसटी अधीक्षक मल्ली ने कथित तौर पर एक व्यवसायी को जीएसटी रिटर्न दाखिल न करने के कारण जुर्माना नोटिस जारी किया था। इस व्यवसायी की एक निजी कंपनी है।

अधिकारियों का कहना है कि गजरौला में तैनात मल्ली ने कर वकील अमित खंडेलवाल के साथ मिलीभगत कर व्यवसायी से उसकी कंपनी पर जुर्माना माफ करने के लिए चार लाख रुपये की मांग की। मल्ली के पास अमरोहा का अतिरिक्त प्रभार है।

सीबीआई प्रवक्ता ने कहा, ‘‘कर अधिवक्ता शिकायतकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहा था, लेकिन उसने सीजीएसटी अधीक्षक (अमरोहा) के साथ मिलकर साजिश रची और शिकायतकर्ता पर आरोपी अधीक्षक को चार लाख रुपये देने का दबाव बनाया।’’

प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि व्यवसायी ने रिश्वत देने में अनिच्छा जताते हुए शिकायत दर्ज कराई।

बयान में कहा गया कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने जाल बिछाया, जिसके दौरान अधीक्षक और अधिवक्ता को रिश्वत के रूप में चार लाख रुपये की पहली किस्त के तौर पर एक लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।

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