देश की खबरें | कावेरी जल विवाद: न्यायालय ने तमिलनाडु को 5,000 क्यूसेक पानी देने के आदेश में दखल से इनकार किया
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नयी दिल्ली, 21 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण एवं कावेरी जल नियमन समिति द्वारा तमिलनाडु को 15 दिन तक प्रति दिन 5,000 क्यूसेक पानी देने के बारे में कर्नाटक सरकार को दिए गए आदेशों के संदर्भ में बृहस्पतिवार को दखल देने से इनकार कर दिया।
कावेरी जल नियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने 12 सितंबर को दिए अपने आदेश में कर्नाटक को अगले 15 दिन तक तमिलनाडु को हर दिन 5,000 क्यूसेक पानी देने का निर्देश दिया था। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूआरसी) ने इस आदेश को बरकरार रखा था।
न्यायमूर्ति बी. आर. गवई, न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि वह तमिलनाडु की उस याचिका पर सुनवाई करने की इच्छुक नहीं है जिसमें राज्य ने कावेरी जल नियमन समिति के आदेश को बरकरार रखने के सीडब्ल्यूएमए के फैसले को इस आधार पर चुनौती दी है कि बारिश की कमी के कारण राज्य सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है।
पीठ ने कहा कि सीडब्ल्यूएमए और सीडब्ल्यूआरसी जैसी विशेषज्ञ संस्थाओं ने सूखे और कम बारिश जैसे सभी प्रासंगिक पहलुओं पर विचार किया और फिर यह आदेश पारित किया।
पीठ ने कहा, ‘‘अत: हमारा मानना है कि दोनों प्राधिकरणों ने जिन तथ्यों पर गौर किया हैं, उन्हें अप्रासंगिक या असंगत नहीं कहा जा सकता। इसे देखते हुए हम आदेशों में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं।’’
उसने कहा कि दोनों प्राधिकरण तमिलनाडु तथा कर्नाटक की परेशानी का जायज लेने के लिए हर 15 दिन में बैठक कर रहे हैं।
तमिलनाडु की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि दोनों प्राधिकरणों ने यह जानने के बावजूद कि अगस्त से बारिश कम हुई है और राज्य को 7,200 क्यूसेक पानी मिलना चाहिए, उसने पानी की मात्रा घटाकर प्रति दिन 5,000 क्यूसेक कर दी है।
रोहतगी ने कहा, ‘‘मेरा राज्य नदी के निचले मुहाने पर है...पानी कर्नाटक से तमिलनाडु में बहता है जहां से वह पुडुचेरी जाता है। बारिश कम हुई है जिस पर प्राधिकारियों ने विचार किया है। सामान्य वर्ष में, मुझे तीन गुना अधिक पानी मिलना चाहिए था लेकिन मैं वह नहीं मांग रहा हूं। मैं वह मांग रहा हूं जिस पर मेरा हक है।’’
उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में पांच लाख एकड़ भूमि पर फसल खड़ी है और वह पेयजल समस्या का सामना कर रहा है जिसके लिए अधिक पानी की आवश्यकता है।
कर्नाटक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि उच्च नदी तट वाला राज्य भी सूखे जैसी स्थिति का सामना कर रहा है और प्राधिकारियों द्वारा 5,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश देना ‘‘राज्य के हित’’ के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इसे और घटाकर प्रति दिन 3,000 क्यूसेक किया जाना चाहिए।
केंद्र का प्रतिनिधित्व करने वाली अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि दोनों राज्यों के दावों के विपरीत केवल सूखा ही इकलौता मानदंड नहीं है जिस पर सीडब्ल्यूएमए ने निर्णय लेने से पहले विचार किया है।
भाटी ने कहा, ‘‘उन्होंने मौसम विभाग के आंकड़ों, बारिश, जलाशयों में जल स्तर और अन्य प्रासंगिक आंकड़ों पर गौर किया है जिसके बाद वे 5,000 क्यूसेक के आंकड़े पर पहुंचे हैं।’’
इसके बाद पीठ ने रोहतगी से कहा कि अदालत तमिलनाडु की याचिका पर सुनवाई करने की इच्छुक नहीं है।
उच्चतम न्यायालय ने खड़ी फसलों की सिंचाई के लिए कर्नाटक से प्रतिदिन 24,000 क्यूसेक कावेरी नदी का जल छोड़े जाने संबंधी तमिलनाडु सरकार की याचिका पर कोई आदेश देने से 25 अगस्त को इनकार कर दिया था।
पीठ ने कर्नाटक द्वारा छोड़े गए पानी की मात्रा पर कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) से रिपोर्ट मांगी थी।
कर्नाटक सरकार ने शीर्ष अदालत में दायर एक हलफनामे में कहा था कि तमिलनाडु की याचिका इस गलत धारणा पर आधारित है कि ‘‘वर्तमान जल वर्ष एक सामान्य जल वर्ष है, न कि संकटग्रस्त जल वर्ष’’।
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