देश की खबरें | नौकरी के बदले नकदी घोटाला: न्यायालय ने बंगाल सरकार से आरोपी पर मुकदमे की मंजूरी देने को कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल सरकार को नौकरी के बदले नकदी मामले में सह-आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने का आदेश दिया। इस मामले में राज्य सरकार में मंत्री रह चुके पार्थ चटर्जी भी आरोपी हैं।
नयी दिल्ली, आठ मई उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल सरकार को नौकरी के बदले नकदी मामले में सह-आरोपी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने का आदेश दिया। इस मामले में राज्य सरकार में मंत्री रह चुके पार्थ चटर्जी भी आरोपी हैं।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने चटर्जी की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया।
चटर्जी की ओर से पेश अधिवक्ता एमएस खान ने इस बात को रेखांकित किया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ मुकदमा चलाने की स्वीकृति दी गई है, लेकिन सह-आरोपी के खिलाफ नहीं, जिसके चलते मामले की सुनवाई में देरी हो रही है।
खान ने दलील दी कि चटर्जी के खिलाफ मुकदमे को अलग नहीं किया जा सकता और इसके निष्कर्ष को लेकर अनिश्चितता है।
खान ने कहा कि चटर्जी का स्वास्थ्य खराब है और वह मुश्किल से चल पाते हैं। उन्होंने अदालत से इन कारकों पर विचार करने का आग्रह किया।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने चटर्जी की जमानत अर्जी का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार अभियोजन की मंजूरी देने के लिए सक्षम प्राधिकारी है और वह सह-आरोपी के मामले में ऐसा नहीं कर रही है।
राजू ने कहा कि सह-आरोपी की जमानत याचिका जुलाई में समन्वय पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आने वाली है। उन्होंने पीठ से अनुरोध किया कि चटर्जी की याचिका को भी उसके साथ जोड़ दिया जाए, क्योंकि दोनों याचिकाएं एक ही उच्च न्यायालय के आदेश पर आधारित हैं।
राजू ने चटर्जी की स्वास्थ्य स्थिति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि एक अस्पताल ने उन्हें फर्जी चिकित्सा प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया है।
शीर्ष अदालत ने कहा, “सुनवाई में मदद के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को याचिकाकर्ता के सह-आरोपी से जुड़े मामलों में मंजूरी देने के बारे में दो हफ्ते में फैसला लेने का निर्देश दिया जाता है। हम इस बात से वाकिफ हैं कि राज्य सरकार और उक्त आरोपी हमारे सामने नहीं हैं। हमने गुण-दोष के आधार पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।”
पीठ ने उच्च न्यायालय के लंबे जमानत आदेशों पर आश्चर्य जताया, वह भी अलग-अलग राय के साथ।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पूछा, “राजू जी, क्या हो रहा है? जमानत के मामलों में उच्च न्यायालय लंबे-लंबे आदेश पारित कर रही हैं और वह भी अलग-अलग राय के साथ।”
पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा में असफल कई अभ्यर्थियों के कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख करने के बाद उच्च न्यायालय ने आठ जून 2022 को आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया।
सीबीआई ने अगले दिन प्राथमिकी दर्ज की। इसके बाद प्रदर्शन निदेशालय (ईडी) ने 24 जून 2022 को राज्य शिक्षा विभाग के कई पदाधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
दोनों जांच एजेंसियों ने 22 जुलाई 2022 को चटर्जी से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की और उनके करीबी सहयोगियों के नाम पर 12 अचल संपत्ति से संबंधित आपत्तिजनक दस्तावेज और ग्रुप डी कर्मियों की नियुक्ति वाले दस्तावेज जब्त करने का दावा किया।
चटर्जी के एक करीबी सहयोगी के आवासीय परिसर में ली गई तलाशी के दौरान 21.9 करोड़ रुपये नकद और 76 लाख रुपये से अधिक मूल्य के सोने के आभूषण जब्त किए गए।
निचली अदालत ने तीन अगस्त 2023 को चटर्जी की जमानत याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल 2023 को उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 08, 2025 09:36 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

