देश की खबरें | बूथ कब्जा करने, फर्जी वोटिंग के मामलों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए : न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को झारखंड में एक मतदान केंद्र पर दंगा करने के मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की अपील को खारिज करते हुए कहा कि बूथ कब्जा करने या फर्जी वोटिंग के किसी भी प्रयास से कड़ाई से निपटा जाना चाहिए क्योंकि यह अंततः कानून और लोकतंत्र के शासन को प्रभावित करता है।

नयी दिल्ली, 23 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को झारखंड में एक मतदान केंद्र पर दंगा करने के मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति की अपील को खारिज करते हुए कहा कि बूथ कब्जा करने या फर्जी वोटिंग के किसी भी प्रयास से कड़ाई से निपटा जाना चाहिए क्योंकि यह अंततः कानून और लोकतंत्र के शासन को प्रभावित करता है।

अपने पहले के फैसलों का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा कि मतदान की स्वतंत्रता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है। पीठ ने कहा, ‘‘चुनावी प्रणाली का सार यह होना चाहिए कि मतदाताओं को अपनी पसंद का प्रयोग करने की स्वतंत्रता सुनिश्चित हो। इसलिए बूथ कब्जा करने या फर्जी वोटिंग के किसी भी प्रयास से सख्ती से निपटा जाना चाहिए क्योंकि यह अंततः लोकतंत्र और कानून के शासन को प्रभावित करता है।’’

न्यायालय ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए वोट डालने की गोपनीयता जरूरी है। पीठ ने कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों में गोपनीयता बनाए रखना जरूरी है, लोकतंत्र में जहां प्रत्यक्ष चुनाव होते हैं, ऐसे में यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि मतदाता बिना किसी डर के अपना वोट डाले और उसके वोट का खुलासा होने पर उसे निशाना नहीं बनाया जाए।

पीठ ने कहा, ‘‘लोकतंत्र और स्वतंत्र चुनाव संविधान के मूल ढांचे का हिस्सा हैं। चुनाव एक ऐसा तंत्र है जो अंततः लोगों की इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। किसी को भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के अधिकार को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।’’

शीर्ष अदालत ने लक्ष्मण सिंह की अपील खारिज कर दी। सिंह को भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (जान बूझकर चोट पहुंचाना) और 147 (दंगा) के तहत दोषी ठहराया गया था। याचिका में कहा गया कि राज्य ने सिंह को दी गई छह महीने की सजा के खिलाफ अपील को प्राथमिकता नहीं दी।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 26 नवंबर 1989 को पाटन थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि आम चुनाव की पूर्व संध्या पर शिकायतकर्ता गोलहाना गांव में मतदान केंद्र संख्या 132 पर भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहा था और मतदाताओं को पर्चियां बांट रहा था।

दूसरे गांव नौडीहा के रहने वाले आरोपी व्यक्ति तभी वहां लाठियों, डंडों, कट्टे के साथ पहुंचे ओर उसे वोटर पर्ची बांटने से रोका और इंकार करने पर आरोपियों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी। जांच पूरी होने के बाद जांच अधिकारी ने 15 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि आवेदनकर्ताओं को ठीक ही भादंसं की धारा 323 और 147 के तहत दोषी ठहराया गया है और उक्त अपराधों के लिए छह महीने की साधारण कारावास की सजा दी गई है।

उच्चतम न्यायालय ने सभी आवेदकों को सजा भुगतने के लिए आत्मसमर्पण करने के निर्देश दिए।

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