देश की खबरें | हिरासत में मौत का मामला: उच्च न्यायालय ने सेंगर के भाई की अंतरिम जमानत 11 मार्च तक बढ़ाई

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नयी दिल्ली, 14 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में कथित हत्या के मामले में भाजपा के निष्कासित नेता कुलदीप सेंगर के भाई को दी गई अंतरिम जमानत शुक्रवार को 11 मार्च तक बढ़ा दी।

न्यायमूर्ति विकास महाजन ने जयदीप सेंगर को चिकित्सा आधार पर राहत देते हुए कहा कि वह मुंह के कैंसर से पीड़ित है और उपचार हो रहा है।

जयदीप के वकील ने मामले में 10 साल की जेल की सजा को निलंबित करने की मांग की और अदालत से आग्रह किया कि मामले में फैसला होने तक उनके मुवक्किल को अंतरिम राहत दी जाए।

उन्होंने दलील दी कि उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें पहले दी गई अंतरिम जमानत 18 फरवरी को समाप्त हो रही है।

उच्च न्यायालय ने आदेश दिया, ‘‘सीबीआई को नोटिस जारी किया जाए। वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए। इस बीच, याचिकाकर्ता को दी गई अंतरिम जमानत सुनवाई की अगली तारीख तक बढ़ाई जाती है। इसे 11 मार्च के लिए सूचीबद्ध करें।’’

उच्च न्यायालय ने जयदीप सेंगर को पहले 3 जुलाई 2024 को राहत दी थी, जिसे 18 नवंबर को विस्तारित कर दिया गया था।

कुलदीप को नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म का दोषी करार दिया गया था और 20 दिसंबर 2019 को शेष जीवन के लिए कारावास की सजा सुनाई गई थी।

नाबालिग लड़की को 2017 में कुलदीप सेंगर द्वारा कथित रूप से अगवा कर उसके साथ बलात्कार किया गया था।

तेरह मार्च 2020 को कुलदीप और उसके भाई जयदीप उर्फ ​​अतुल सिंह को निचली अदालत ने हिरासत में पीड़िता के पिता की मौत के मामले में 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही, 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

पीड़िता के पिता को कथित तौर पर आरोपियों के इशारे पर शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था और पुलिस की बर्बरता के कारण 9 अप्रैल 2018 को हिरासत में उनकी मौत हो गई थी।

निचली अदालत ने कहा था कि परिवार का भरण पोषण करने वाले व्यक्ति (पीड़िता के पिता) की हत्या को लेकर ‘‘कोई नरमी’’ नहीं बरती जा सकती।

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दोषियों की अपील उच्च न्यायालय में लंबित है।

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