देश की खबरें | यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द होने से होने से केंद्र सरकार की नाकामी उजागर हुई: राकांपा (एसपी)

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मुंबई, 20 जून शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (एसपी) ने यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द करने को लेकर बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार की आलोचना की और कहा कि इससे देश की शिक्षा प्रणाली में भाजपा नीत सरकार की एक और ‘‘विफलता’’ उजागर हो गई है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने बुधवार देर रात यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द करने का आदेश दिया, क्योंकि परीक्षा की शुचिता से समझौता होने की सूचना मिली थी। यह आदेश मेडिकल पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए होने वाली परीक्षा नीट-यूजी को लेकर जारी विवाद के बीच आया है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइट क्रैस्टो ने एक बयान में कहा कि कुछ दिन पहले, नीट परीक्षा के मुद्दे ने शिक्षा प्रणाली में व्याप्त “गड़बड़ियों” और “पक्षपात” को उजागर कर दिया है।

उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार देश के छात्रों के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाने में विफल होकर उनकी मेहनत पर पानी फेर रही है और उनके जीवन से भी खेल रही है।”

यूजीसी-नेट के माध्यम से जूनियर रिसर्च फेलोशिप, सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति तथा भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पीएचडी में दाखिले के लिए पात्रता निर्धारित की जाती है।

क्रैस्टो ने कहा कि अगर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना विभाग नहीं संभाल सकते तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।

उन्होंने कहा, "परीक्षा रद्द करके सरकार कड़ी मेहनत करने वाले छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है।"

इससे पहले दिन में, राकांपा (एसपी) नेता और बारामती की सांसद सुप्रिया सुले ने नीट (यूजी) मेडिकल दाखिला परीक्षा और अन्य परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की मांग की।

उन्होंने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी लगातार विकसित हो रही है, इसके बावजूद राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (स्नातक) जैसी विभिन्न परीक्षाओं के आयोजन में कई मुद्दे सामने आ रहे हैं।

सुले ने कहा, "सरकार किसानों, महिलाओं और छात्रों के मुद्दों के प्रति असंवेदनशील है। नीट परीक्षा, तलाठी परीक्षाएं और अब यूजीसी (नेट) परीक्षाओं में लगातार अनियमितताएं हो रही हैं। जिस तरह से प्रौद्योगिकी विकसित हो रही है, उसके बावजूद इन परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां क्यों हो रही हैं? इन अनियमितताओं की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया जाना चाहिए।"

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