देश की खबरें | कश्मीर प्रेस क्लब का पंजीकरण रद्द करना और परिसर का अधिग्रहण अवैध: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा कश्मीर प्रेस क्लब के पंजीकरण को रद्द करने और उसके परिसर का अधिग्रहण करने को बृहस्पतिवार को "अवैध" करार दिया और कहा कि पत्रकारों के विरूद्ध इस तरह की " कठोर कार्रवाई " केंद्र शासित प्रदेश की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी।

नयी दिल्ली, 20 जनवरी प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन द्वारा कश्मीर प्रेस क्लब के पंजीकरण को रद्द करने और उसके परिसर का अधिग्रहण करने को बृहस्पतिवार को "अवैध" करार दिया और कहा कि पत्रकारों के विरूद्ध इस तरह की " कठोर कार्रवाई " केंद्र शासित प्रदेश की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगी।

पीसीआई ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को पत्र लिखकर मामले में प्रभावी हस्तक्षेप करने की मांग करते हुए कहा कि प्रशासन के इस कदम से स्थानीय पत्रकारों के मूलभूत संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ है।

पीसीआई ने आरोप लगाया कि कार्रवाई "जानबूझकर" की गई क्योंकि कश्मीर प्रेस क्लब (केपीसी) की निर्वाचित प्रबंधन समिति ने अगले महीने चुनाव की तिथि की घोषणा की थी।

पीसीआई ने जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल से आग्रह किया, “आपसे हमारा विनम्र अनुरोध है कि प्रदेश में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए कश्मीर प्रेस क्लब का पंजीकरण एवं क्लब की भूमि एवं भवन का आवंटन तत्काल बहाल किया जाए।”

पत्रकारों के संगठन ने यह भी मांग की कि तय कार्यक्रम के अनुसार निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने में जो बाधाएं आ रही हैं, उन्हें दूर किया जाए।

उसने कहा, “प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की प्रबंध समिति को इस बात की गहरी चिंता है कि स्थानीय प्रशासन ने 16 जनवरी को हम सभी की ओर से आप को गई अपील का कोई संज्ञान नहीं लिया।”

पीसीआई ने कहा कि सवालों का जवाब देने के बजाय, जम्मू कश्मीर प्रशासन ने "एकतरफा" तरीके से केपीसी के पंजीकरण को रद्द कर दिया और क्लब को आवंटित भूमि का नियंत्रण अपने कब्जे में ले लिया और लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित संस्था को अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया।

उसने कहा, “हमारा मानना है कि कश्मीर प्रेस क्लब का पंजीकरण रद्द करना और निर्वाचित पदाधिकारियों को हटाकर कुछ लोगों को सौंपना अनुचित और अवैध कार्य था। लोकतांत्रिक ढंग से चलाए जा रहे प्रेस क्लब की जमीन और उसके परिसर पर राज्य संपदा विभाग द्वारा कब्जा करना स्थानीय पत्रकारों के मौलिक संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।”

पीसीआई ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में "सबसे अधिक परेशानी" वाली बात यह है कि कि पत्रकार समूहों के भीतर की गुटबाजी को बहाना बनाकर प्रशासन ने "कठोर कार्रवाई ’’ को अंजाम दिया।

उसने कहा, “पत्रकारों साथ यह दुर्व्यवहार और कठोर कार्रवाई से राज्य की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।” पीसीआई ने कहा कि स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई न केवल "अलोकतांत्रिक और अवैध" है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर भी हमला है।

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