एमबीबीएस इंटर्न का वजीफा बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया पर अभियान
कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के बीच दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों की जांच और सर्वेक्षण के लिए प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक काम करने के बाद इस वजीफे को कम बताते हुए इन इंटर्न ने ट्विटर पर 'वी डिमांड स्टाइपेंड इंक्रीमेंट' और 'इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाओ' हैशटैग से अभियान शुरू किया है।
जयपुर, आठ मई राजस्थान और उत्तरप्रदेश के एमबीबीएस इंटर्न ने अपने इंटर्नशिप के वजीफे में बढ़ोतरी के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाया है। इन इंटर्न का वजीफा 233 रुपये प्रतिदिन है।
कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के बीच दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों की जांच और सर्वेक्षण के लिए प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक काम करने के बाद इस वजीफे को कम बताते हुए इन इंटर्न ने ट्विटर पर 'वी डिमांड स्टाइपेंड इंक्रीमेंट' और 'इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ाओ' हैशटैग से अभियान शुरू किया है।
मेडिकल इंटर्न शिवम रायका ने ट्वीट किया, 'केवल हीरो और योद्धा कहना काफी नहीं है। एमबीबीएस इंटर्न को 233 रूपये प्रतिदिन स्टाइपेंड मिलता है क्या यह न्यायोचित है?'
एक अन्य इंटर्न बी एल बिजारनिया ने लिखा है, 'साढ़े चार साल के अथक प्रयासों और कठिन काम के बदले में आज हमें 233 रूपये प्रतिदिन मिलता है यह सिस्टम के लिये शर्मनाक है।'
एक मेडिकल इंटर्न के अनुसार देशभर में राजस्थान में सबसे कम 7,000 रूपये प्रतिमाह वजीफा मिलता है वहीं उत्तरप्रदेश में 7,500 रूपये प्रतिमाह जबकि असम में 30,000 रूपये और हिमाचल प्रदेश में 17,000 रूपये मिलते है। अधिकतर राज्यों में 15,000 रूपये से अधिक वजीफा मिलता है।
अपने एमबीबीएस पाठयक्रम को पूरा करने के बाद चिकित्सकों को फील्ड के अनुभव के लिये एक साल की परिभ्रामी :रोटेटरी: इंटर्नशिप पर भेजा जाता है उस दौरान संबंधित सरकारों द्वारा उन्हें एक तय वजीफा दिया जाता है।
सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष श्याम सुंदर ने 'पीटीआई ' को बताया कि 2017 में राजस्थान सरकार ने इंटर्न को दिये जाने वाले वजीफे को 3,500 से बढ़ाकर 7,000 रुपये किया था। हमने अब इसमें और संशोधन के लिये मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा है।
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