विदेश की खबरें | कंबोडिया की संसद ने पीढ़ीगत बदलाव के तहत हुन सेन के बेटे को प्रधानमंत्री के रूप में मंजूरी दी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. हुन मानेत (45) ने कंबोडिया के सेना प्रमुख के रूप में सेवाएं देने के बाद जुलाई में हुए चुनाव में पहली बार संसदीय सीट पर जीत हासिल की। हुन सेन पिछले 38 वर्ष से देश की कमान संभाल रहे हैं और उन्होंने चुनाव से पहले ही घोषणा की थी कि वे इस बार अपने बड़े बेटे हुन मानेत को कमान सौंप देंगे।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

हुन मानेत (45) ने कंबोडिया के सेना प्रमुख के रूप में सेवाएं देने के बाद जुलाई में हुए चुनाव में पहली बार संसदीय सीट पर जीत हासिल की। हुन सेन पिछले 38 वर्ष से देश की कमान संभाल रहे हैं और उन्होंने चुनाव से पहले ही घोषणा की थी कि वे इस बार अपने बड़े बेटे हुन मानेत को कमान सौंप देंगे।

मानेत को प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपे जाने को सांसदों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी और वह मंगलवार को आधिकारिक रूप से शपथ ग्रहण करेंगे।

हुन मानेत ने वेस्ट प्वाइंट स्थित ‘यूएस मिलिट्री अकेडमी’ से स्नातक, न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और ब्रिटेन की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।

वह जिस कैबिनेट का नेतृत्व करेंगे, उनमें तीन चौथाई सदस्य नए चेहरे हैं, लेकिन इनमें अधिकतर सदस्य नेताओं की संतानें या उन नेताओं के रिश्तेदार हैं, जिनके स्थान पर उन्हें कैबिनेट में जगह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानेत के प्रधानमंत्री बनने के बाद देश में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।

स्वीडन के लुंड विश्वविद्यालय में कंबोडिया संबंधी मामलों की विशेषज्ञ एस्ट्रिड नोरेन-निल्सन ने कहा, ‘‘राजनीतिक दृष्टिकोण को लेकर इन पीढ़ियों में कोई बड़ा अंतर नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि राजनीतिक-सह-व्यावसायिक अभिजात वर्ग की शक्ति को बरकरार रखने के लिए पीढ़ीगत बदलाव किया गया है।

हुन सेन की पार्टी ने पिछले महीने एकतरफा चुनाव में जीत हासिल की थी।

कंबोडिया के निर्वाचन आयोग ने 23 जुलाई को हुए आम चुनाव के परिणामों की घोषणा में प्रधानमंत्री हुन सेन की सत्तारूढ़ पार्टी को भारी बहुमत के साथ विजयी घोषित किया गया।

इन चुनावों की पश्चिमी देशों की सरकारों और अधिकार समूहों ने कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि ये चुनाव न तो निष्पक्ष थे और न ही स्वतंत्र, क्योंकि अहम विश्वसनीय विपक्षी दलों को इसमें भाग नहीं लेने दिया गया।

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