जरुरी जानकारी | रिण न चुकाने वालों के साथ ढील पर सरकारी बैंकों के खिलाफ कार्रवाई की याचिका पर केन्द्र से जवाब तलब

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बड़े बड़े कर्जो का भुगतान करने में विफल रहने वाली कंपनियों के प्रवर्तकों औैर निदेशकों की व्यक्तिगत गारंटी भुनाने के अधिकार का प्रयोग नहीं करने वाले सरकारी बैकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रतिवेदन पर वित्त मंत्रालय से जवाब मांगा है।

नयी दिल्ली, 21 जुलाई उच्चतम न्यायालय ने बड़े बड़े कर्जो का भुगतान करने में विफल रहने वाली कंपनियों के प्रवर्तकों औैर निदेशकों की व्यक्तिगत गारंटी भुनाने के अधिकार का प्रयोग नहीं करने वाले सरकारी बैकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के प्रतिवेदन पर वित्त मंत्रालय से जवाब मांगा है।

इस मसले को लेकर दायर याचिका में दावा किया गया है कि कर्जो की अदायगी करने में विफल रहने वाले बड़े कार्पोरेट के लोगों की निजी गारंटी भूनाने की व्यवस्था पर अमल नहीं करने की वजह से सरकारी क्षेत्र के बैंकों को रोजाना 1900 करोड़ रूपए का नुकसान हो रहा है।

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न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन और न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा की पीठ ने सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा के कथन का संज्ञान लिया और उनसे कहा कि वह दो सप्ताह के भीतर इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय को प्रतिवेदन दें और सरकार को इसके बाद चार सप्ताह में अपना जवाब देना होगा।

पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमारा मानना है कि याचिका में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि वित्त मंत्रालय ने एक परिपत्र के माध्यम से प्रवर्तकों और प्रबंधन कर्मियों की व्यक्तिगत गारंटी भुनाने की व्यवस्था पर अमल करने का निर्देश दिया था।

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याचिकाकर्ता के अनुसार इस परिपत्र के बावजूद सार्वनिक क्षेत्र के बैंक ऐसी गारंटी पर अमल नहीं कर रहे हैं जिसकी वजह से राजस्व का बहुत ज्यादा नुकसान हो रहा है।

यह याचिका सौरभ जैन नाम के व्यक्ति ने दायर की है और उन्होंने इस मामले में कंपनियों के प्रवर्तकों, निदेशकों तथा प्रबंधक कामिकों की व्यक्तिगत गारंटी पर अमल नहीं करने वाले सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही का अनुरोध किया है।

इस मामले में सुनवाई के दौरान मिश्रा ने कहा था कि उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि इन बैंकों को एक वित्तीय वर्ष में करीब 1.85 लाख करोड़ रूपए का नुकसान हुआ जबकि वे बड़े कार्पोरेट बकायादारों की व्यक्तिगत गारंटी पर अमल करने में संकोच कर रहे हैं।

उनका कहना था कि आम आदमियों से कर्ज की वसूली के मामले में ये बैंक बहुत ही बारीकी से कर्ज की वसूली करते हैं लेकिन कार्पोरेट कंपनियों के प्रवर्तक, अध्यक्ष और प्रबंधक बहुत बड़ी राशि बकाया होने के बावजूद बच निकलते हैं।

पीठ ने मिश्रा के इस कथन का संज्ञान लिया और कहा कि याचिकाकर्ता को पहले वित्त मंत्रालय जाना चाहिए क्योंकि उसने ही इस बारे में अधिसूचना जारी की थी।

न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता अगर उसके प्रतिवेदन पर केन्द्र की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हो तो फिर शीर्ष अदालत आ सकता है।

अनूप

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