कोलकाता, पांच जुलाई कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने बुधवार को एकल न्यायाधीश की पीठ के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की अपील को खारिज कर दिया।
एकल न्यायाधीश की पीठ ने मानवाधिकार निकाय के उस निर्देश को खारिज कर दिया था जिसमें उसने पश्चिम बंगाल में आगामी पंचायत चुनावों में संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान करने और ‘माइक्रो ऑब्जर्वर’ के तौर अपने अधिकारियों की तैनाती की बात कही थी।
खंडपीठ ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का निर्देश स्वतंत्र और निष्पक्ष पंचायत चुनाव कराने के राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण करना चाहता है।
एनएचआरसी ने 12 जून के आदेश में अपने महानिदेशक (अन्वेषण) विशेष मानवाधिकार पर्यवेक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त किया था। उन्हें हाल की घटनाओं की जानकारी देने और एसईसी के परामर्श से संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्र जहां पंचायत चुनावों से संबंधित नियमों के उल्लंघन की आशंका है के बारे में पश्चिम बंगाल का मौके पर सर्वेक्षण करना था।
इसमें कहा गया है कि एक बार संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान हो जाने के बाद, डीजी पंचायत चुनाव के दौरान और उसके बाद राज्य के सभी संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों में ‘माइक्रो ऑब्जर्वर’ की तैनाती के लिए एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
आदेश में कहा गया कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान के बाद महानिदेशक उसे (आयोग को) राज्य के सभी संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों में पंचायत चुनावों के दौरान और बाद में ‘माइक्रो ऑब्जर्वर’ तैनात करने के लिये एक व्यापक रिपोर्ट देंगे।
यह मानते हुए कि वह एकल पीठ द्वारा पारित आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है, मुख्य न्यायाधीश टी.एस. शिवगणन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एनएचआरसी और महानिदेशक की अपील को खारिज कर दिया।
पीठ में न्यायमूर्ति हिरणमय भट्टाचार्य भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि 12 जून का एनएचआरसी आदेश मानव अधिकारों के किसी विशिष्ट उल्लंघन या मानव अधिकारों के संरक्षण में लापरवाही या किसी लोक सेवक द्वारा इसके उकसावे की बात नहीं करता है।
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