देश की खबरें | पिंजड़ा तोड़ सदस्य को वकीलों से बातचीत के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस की सुविधा दी जाएगी : जेल अधिकारी

नयी दिल्ली,तीन जुलाई तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय को शुक्रवार को सूचित किया कि पिंजड़ा तोड़ की सदस्य एवं उत्तर पूर्वी दिल्ली में साम्प्रदायिक दंगे से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार देवांगना कालिता अपने वकील से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत कर सकती हैं। तिहाड़ जेल की जेल नंबर छह में यह सुविधा मुहैया कराई जा रही है, जहां महिलाओं को रखा जाता है।

तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने न्यायमूर्ति विभू बाखरू के समक्ष यह बयान कालिता की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। कालिता ने अपनी याचिका में प्रतिदिन अपने वकील से वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत करने और जेल में किताबें और पठन सामग्री लाने की मांग की थी।

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अन्य बाहरी स्रोत से किताबें पाने के संबंध में और याचिकाकर्ता की यह चिंता की वकील के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस की बातों को जेल अधिकारी सुन सकते हैं क्योंकि वे हमेशा पास में ही खड़े होते हैं पर उच्च न्यायालय ने कहा कि सह आरोपी एवं पिंजड़ा तोड़ सदस्य नताशा नरवाल मामले में जो आदेश दिए गए हैं वे कालिता पर भी लागू किए जा सकते हैं। नरवाल ने भी ऐसे ही मुद्दे उठाए थे।

नरवाल के मामले में उच्च न्यायालय ने 30 जून को अपने आदेश में प्रत्येक सप्ताह दो बार 30-30 मिनट तक वीडियो कॉन्फ्रेंस करने की अनुमति दी थी। साथ ही उसे बाहर से किताबें मंगाने और हेडफोन उपलब्ध कराने को भी कहा गया था।

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न्यायमूर्ति बखरू ने कहा कि नरवाल मामले में 30जून के आदेश के संबंध में तथा दिल्ली सरकार के स्थाई वकील राहुल मेहरा और अधिवक्ता चैतन्य गोसाईं द्वारा जेल अधिकारियों की ओर से दाखिल की गई स्थिति रिपोर्ट को देखते हुए मामले का निस्तारण किया जा सकता हे।

इस टिप्पणी के साथ ही उच्च न्यायालय ने याचिका का निपटारा कर दिया।

गौरजलब है कि पिंजड़ा तोड़ समूह 2015में बनाया गया था और इसका उद्देश्य छात्रावासों तथा पेइंग गेस्ट जैसी आवासीय सुविधाओं को महिला छात्रों के लिए कम रोक-टोक वाला स्थान बनाना था।

नरवाल और कालिता फिलहाल न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में हैं और उन्हें फरवरी में संशोधित नागरिता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के संबंध में दिल्ली पुलिस ने 23मई को गिरफ्तार किया था।

हालांकि गिरफ्तारी के दूसरे दिन यानी 24मई को निचली अदालत ने दोनों को जमानत दे दी थी लेकिन कुछ समय बाद दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने उनसे पूछताछ करने के लिए अर्जी दी इन्हें अलग अलग मामलों मे औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया था।

दोनों को उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगा मामले में कथित संलिप्तता के तीसरे मामले में भी गिरफ्तार किया गया था।

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