देश की खबरें | आईपीएस अधिकारी का कैडर स्थानांतरण: उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ प. बंगाल की याचिका खारिज
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल सरकार की एक याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी, जिसमें उसने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के एक फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। कैट ने राज्य सरकार को एक आईपीएस अधिकारी का पश्चिम बंगाल से राजस्थान कैडर में स्थानांतरण से संबंधित मामले में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देने के लिए कहा था।
नयी दिल्ली, छह जुलाई उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली पश्चिम बंगाल सरकार की एक याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी, जिसमें उसने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) के एक फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। कैट ने राज्य सरकार को एक आईपीएस अधिकारी का पश्चिम बंगाल से राजस्थान कैडर में स्थानांतरण से संबंधित मामले में अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) देने के लिए कहा था।
पश्चिम बंगाल कैडर के 2019 बैच के आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी सागर ने राज्य से राजस्थान में कैडर परिवर्तन के लिए न्यायाधिकरण में इस आधार पर याचिका दायर की थी कि उनकी पत्नी भी राजस्थान कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं और ऐसे दम्पती को कैडर बदलने की अनुमति होती है।
इस साल फरवरी में पारित एक आदेश में, अधिकरण की नयी दिल्ली स्थित प्रधान पीठ ने पश्चिम बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी द्वारा दायर मूल आवेदन को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया था और राज्य को चार सप्ताह के भीतर उन्हें एनओसी देने का निर्देश दिया था और ऐसा न करने की स्थिति में ‘‘एनओसी जारी किया हुआ’’ मान लिया जाएगा।
अधिकरण ने यह भी कहा था कि उसके बाद केंद्र चार सप्ताह के भीतर उचित आदेश पारित करके उनके कैडर को पश्चिम बंगाल से राजस्थान स्थानांतरित करने के लिए तत्काल कार्रवाई करेगा।
इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने अधिकरण के आदेश को रद्द करने का अनुरोध करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने इस साल 15 मार्च को एक आदेश पारित करके राज्य की याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि अधिकरण के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था। यह याचिका बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आयी।
पीठ ने कहा, ‘‘सरकारें कभी-कभी बहुत अतर्कसंगत होती हैं। आप केवल मुकदमेबाजी के लिए मुकदमा करते हैं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।’’
पश्चिम बंगाल की ओर से पेश वकील ने कहा कि अधिकारी विवाह के आधार पर कैडर स्थानांतरण का अनुरोध कर रहा है।
पीठ ने कहा, ‘‘यह बहुत ही अतर्कसंगत है। आप कहते हैं कि पत्नी यहां (पश्चिम बंगाल) आयें। आप नहीं चाहते कि वे एकसाथ रहें?’’
शीर्ष अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार बृहस्पतिवार से 10 दिनों के भीतर राहत देने का आदेश पारित करेगी, ऐसा नहीं करने पर इसे सहमति माना जाएगा।
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