देश की खबरें | भारत को शीर्ष पांच खेल देशों में शामिल करने के लिये कैबिनेट ने खेलो भारत नीति को मंजूरी दी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विश्व खेलों में भारत को शीर्ष पांच में लाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को खेलो भारत नीति को मंजूरी दी जिसका उद्देश्य देश को 2036 ओलंपिक के लिए मजबूत दावेदार बनाने के लिए एक मजबूत प्रशासनिक ढांचे के साथ-साथ कोचिंग और खिलाड़ियों के समर्थन के मामले में ‘विश्व स्तरीय प्रणाली’ तैयार करना है।
नयी दिल्ली, एक जुलाई विश्व खेलों में भारत को शीर्ष पांच में लाने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंगलवार को खेलो भारत नीति को मंजूरी दी जिसका उद्देश्य देश को 2036 ओलंपिक के लिए मजबूत दावेदार बनाने के लिए एक मजबूत प्रशासनिक ढांचे के साथ-साथ कोचिंग और खिलाड़ियों के समर्थन के मामले में ‘विश्व स्तरीय प्रणाली’ तैयार करना है।
पहले इसे राष्ट्रीय खेल नीति कहा जाता था और 1984 में पहली बार पेश किया गया था। खेलो भारत नीति 2025 अब 2001 की नीति का स्थान लेगी। यह देश के खेल पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतरी के लिए योजनाओं को तैयार करने के लिए एक ‘मार्गदर्शक दस्तावेज’ है।
सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस नीति और मंत्रिमंडल के अन्य फैसलों के बारे में संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने पिछले 10 साल के अनुभव का इस्तेमाल किया है और नयी नीति खेलों में सुधार की दिशा में काम करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य 2047 तक भारत को शीर्ष पांच खेल राष्ट्रों में शामिल करना है। यह हमारा मुख्य उद्देश्य है।’’
भारत 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी की इच्छा जता चुका है जिसके लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर के आयोजनों को देश में लाने पर बड़े पैमाने पर जोर दिया गया है।
प्रेस सूचना ब्यूरो के एक बयान में नयी नीति को केंद्रीय मंत्रालयों, नीति आयोग, राज्य सरकारों, राष्ट्रीय खेल संघों (एनएसएफ), खिलाड़ियों, इस मामले के विशेषज्ञों और हितधारकों के साथ ‘व्यापक विचार-विमर्श’ का परिणाम बताया गया है।
इसके तहत खेल को पर्यटन और आर्थिक विकास से जोड़ा जायेगा ।
वैष्णव ने कहा, ‘‘बड़ी संख्या में लोग आईपीएल, फुटबॉल मैच देखने के लिए यात्रा करते हैं। इससे पर्यटन और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।’’
यह दस्तावेज राष्ट्रीय शिक्षा नीति के साथ जुडने का प्रयास करता है, जिसमें खेलों को स्कूली पाठ्यक्रम का एक अभिन्न अंग बनाया गया है। इसमें कहा गया है कि इसका उद्देश्य शिक्षकों और शारीरिक शिक्षा शिक्षकों को खेल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रशिक्षण से लैस करना है।
इसके सूचीबद्ध लक्ष्यों में खेल प्रशासन के लिए एक मजबूत नियामक ढांचा स्थापित करना और पीपीपी (सरकारी और निजी क्षेत्रों की भागीदारी) और सीएसआर के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी सहित नवीन वित्तपोषण तंत्र का विकास करना शामिल है।
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने इसे भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को नया आकार देने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम बताया।
उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘‘यह ऐतिहासिक नीति जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे, खिलाड़ियों के विकास का समर्थन करने और भारत को वैश्विक खेलों में एक मजबूत ताकत के रूप में स्थापित करने के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा की तरह है।’’
पिछली नीति में किए गए बदलावों में निजी कंपनियों की अधिक भागीदारी का आह्वान करना शामिल है। मांडविया पहले ही इसका जिक्र कर बता चुके हैं कि उन्होंने 40 से अधिक कंपनियों के साथ विचार-विमर्श किया है जो व्यक्तिगत ओलंपिक खेलों को अपनाने के लिए इच्छुक हैं।
खेल मंत्रालय सभी खेलों में ‘लीग संस्कृति’ को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम कर रहा है, जिसमें उन खेलों का वित्तपोषण करना भी शामिल है जिन्हें आर्थिक मदद की जरूरत है।
लीग शुरू करना भी नयी नीति का घोषित उद्देश्य है। दस्तावेज में महिलाओं, ‘एलजीबीटीक्यू प्लस’ समुदाय, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और आदिवासी समुदायों जैसे कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों के बीच खेलों में अधिक समावेशिता को बढ़ावा देने और भागीदारी बढ़ाने का भी प्रयास किया गया है।
नीति में कहा गया है, ‘‘ऐसी सुविधाओं का निर्माण और रखरखाव बाधाओं को काफी हद तक कम कर सकता है और उनके बीच सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा दे सकता है।’’
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 01, 2025 05:08 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

