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देश की खबरें | संसद की सुरक्षा में सेंध: दो जुलाई को जमानत याचिका पर आदेश सुनाएगा दिल्ली उच्च न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय दिसंबर 2023 में संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका पर दो जुलाई को फैसला सुनाएगा।

देश की खबरें | संसद की सुरक्षा में सेंध: दो जुलाई को जमानत याचिका पर आदेश सुनाएगा दिल्ली उच्च न्यायालय

नयी दिल्ली, एक जुलाई दिल्ली उच्च न्यायालय दिसंबर 2023 में संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका पर दो जुलाई को फैसला सुनाएगा।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने 21 मई को आरोपियों नीलम आजाद और महेश कुमावत की जमानत याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

आरोपियों ने उनकी जमानत याचिका खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।

वर्ष 2001 संसद आतंकवादी हमले की बरसी पर संसद की सुरक्षा में सेंध की एक बड़ी घटना में आरोपी सागर शर्मा और मनोरंजन डी शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कथित तौर पर कूद गए थे तथा कैनिस्टर से पीली गैस छोड़ने के साथ ही नारेबाजी की थी। बाद में कुछ सांसदों ने उन्हें काबू कर लिया था।

लगभग उसी समय, दो अन्य आरोपियों - अमोल शिंदे और आजाद - ने संसद परिसर के बाहर "तानाशाही नहीं चलेगी" के नारे लगाते हुए कैनिस्टर से रंगीन गैस छोड़ी थी।

आजाद के वकील ने कहा कि उसे जमानत दी जानी चाहिए, क्योंकि इस मामले में यूएपीए के प्रावधान लागू नहीं होते। उसके वकील ने दावा किया कि वह संसद में कोई विस्फोटक लेकर नहीं आई थी और केवल बाहर खड़ी थी।

जमानत याचिका का विरोध करते हुए पुलिस ने आरोप लगाया कि आरोपी की मंशा 2001 के संसद हमले की "पीड़ादायक यादें" दोबारा ताज़ा करने की थी।

अभियोजन पक्ष ने जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि प्रारंभिक जांच के दौरान पता चला कि आरोपी आजाद और शिंदे, - शर्मा और मनोरंजन डी के सहयोगी थे और उन्होंने मिलकर उक्त कृत्य को अंजाम दिया था।

अभियोजन पक्ष ने उच्च न्यायालय को सूचित किया कि उसने मामले में आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार "विधिवत" बताए गए हैं। अदालत ने सवाल किया था कि क्या मामले में आरोपियों को गिरफ्तारी के आधार बताए गए थे।

अदालत ने इससे पहले आरोपियों से 13 दिसंबर की विशिष्ट तिथि चुनने का कारण पूछा था, जिस दिन 2001 में संसद भवन पर हमला हुआ था।

अदालत ने पुलिस से भी पूछा था कि क्या संसद के अंदर और बाहर धुंए वाले कैनिस्टर को ले जाना या उसका उपयोग करना यूएपीए के अंतर्गत आता है और क्या यह आतंकवादी गतिविधियों की परि के अंतर्गत आता है।

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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 01, 2025 09:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).