देश की खबरें | बुलेट ट्रेन परियोजना : जमीन अधिग्रहण के खिलाफ कंपनी की याचिका सुनने से शीर्ष अदालत का इनकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को गोदरेज ऐंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग को लिमिटेड (जीबीएमसीएल) की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए विक्रोली में अधिग्रहित जमीन को वापस करने की अर्जी बंबई उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने को चुनौती दी थी।

नयी दिल्ली, 24 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को गोदरेज ऐंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग को लिमिटेड (जीबीएमसीएल) की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें उन्होंने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए विक्रोली में अधिग्रहित जमीन को वापस करने की अर्जी बंबई उच्च न्यायालय द्वारा खारिज किए जाने को चुनौती दी थी।

प्रधान न्यायाधीश डी.वाई.चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, ‘‘ बहुत पानी बह चुका है। कब्जा (जमीन पर)लिया जा चुका है और निर्माण शुरू हो चुका है। केवल एक मुद्दा बचा है और वह है मुआवजा बढ़ाने का।’’ इस पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जे बी पादीवाला शामिल थे।

पीठ ने नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) की ओर से पेश सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता के इस तर्क पर संज्ञान लिया कि मौजूदा मामले की वजह से बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत में 1,003 करोड़ रुपये की वृद्धि हो चुकी है जबकि केवल मुआवजा का मुद्दा ही बचा है।

सुरांश चौधरी सहित कई वकील सॉलिसीटर जनरल की सहायता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मुंबई के उपनगर विक्रोली की जिस जमीन का सवाल है उसे महाराष्ट्र सरकार और एनएचएसआरसीएल ने परियोजना के लिए अधिग्रहित किया है।

गोदरेज ऐंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग को लिमिटेड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि कंपनी चाहती है कि एनएचएचआरसीएल और महाराष्ट्र सरकार दूसरा भूखंड ले।

उन्होंने कहा,‘‘राज्य ने कहा है कि वह 572 करोड़ रुपये देगी, मैं और चाहता हूं।’’

पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि याचिकाकर्ता को आजादी है कि जमीन के लिए मुआवजा बढ़ाने के दावे के लिए याचिका दायर करे लेकिन अधिग्रहण के खिलाफ याचिका पर सुनवाई नहीं होगी क्योंकि जमीन पर पहले ही कब्जा लिया जा चुका है और निर्माण शुरू हो चुका है।

जीबीएमसीएल ने सितंबर 2022 को परियोजना के लिए अधिग्रहित 9.69 एकड़ जमीन के लिए उप कलेक्टर द्वारा घोषित 264 करोड़ रुपये मुआवजा को बंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने कंपनी की याचिका खारिज कर दी थी और शीर्ष अदालत से भी उसे राहत नहीं मिली है।

गौरतलब है कि एनएचएसआरसीएल 508.17 किलोमीटर लंबे अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना का निर्माण कर रहा है जिसमें 21 किलोमीटर का रास्ता भूमिगत होगा और यह दूरी तीन घंटे से भी कम समय में तय की जाएगी। इस परियोजना के वर्ष 2026 में पूरा होने की संभावना है।

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