ताजा खबरें | बजट कश्मीर चर्चा दो रास

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में ‘जीएसटी’ वसूली बढ़ी है जिसका मतलब है कि राज्य में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अब पत्थरबाजों को प्रोत्साहन नहीं दिया जाता और उन पर नकेल कसी जा रही है इसलिए राज्य में पर्यटन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सात साल में राज्य में सबसे ज्यादा पर्यटक आए।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में ‘जीएसटी’ वसूली बढ़ी है जिसका मतलब है कि राज्य में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में अब पत्थरबाजों को प्रोत्साहन नहीं दिया जाता और उन पर नकेल कसी जा रही है इसलिए राज्य में पर्यटन बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष सात साल में राज्य में सबसे ज्यादा पर्यटक आए।

भाजपा सदस्य ने कहा कि मोदी सरकार के शासनकाल में जम्मू कश्मीर में आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए पुरजोर प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि सीमा पार से समर्थित व प्रायोजित आतंकवाद की घटनाओं में 1989 से पांच अगस्त 2109 तक सेना या पुलिस के 5,886 जवान मारे गये। उन्होंने कहा कि राज्य से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद 2021 में आतंकवाद की 229 घटनाएं हुई व 2020 में यह संख्या 244 थी। उन्होंने कहा कि घुसपैठ में 33 प्रतिशत की कमी आयी है।

जैन ने दावा कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला के दबाव के कारण अनुच्छेद 370 लगाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद की मर्जी के बिना उन पर दबाव डालकर अनुच्छेद 35 ए को लागू करवाया गया।

उन्होंने कश्मीरी पंडितों के बारे में बनी फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘‘यदि सत्य को दिखाना एवं सत्य की चर्चा करना पाप है तो यह पाप करते रहना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि आज अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के वे पुरोधा कहां गये जो ‘‘मोमबत्ती लेकर चलते थे और देश में तमाम बवंडर खड़े करते थे और आज वे ही ‘कश्मीर फाइल्स’ का विरोध कर रहे हैं।’’

भाजपा सदस्य ने कहा, ‘‘जो लेफ्ट लिबरल्स के चश्मे से, तुष्टिकरण के काले चश्मे से देखेंगे, उन्हें कश्मीरी पंडितों पर जो अत्याचार हुए हैं, वे नहीं दिखेंगे।’’ उन्होंने सवाल किया कि 1987 में जम्मू कश्मीर में फारूक अब्दुल्ला की सरकार किसने बनवाई थी? उन्होंने दावा किया कि पहले की सरकारों में ‘‘देशहित से ज्यादा दोस्ती को प्राथमिकता दी जाती थी।’’

तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद नदीमुल हक ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि लगातार चौथी बार ऐसा हो रहा है कि जम्मू कश्मीर का बजट राज्य विधानसभा में पेश ना होकर संसद में पेश हो रहा है।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल न होने से इस बजट पर सवालिया निशान लग जाता है। उन्होंने कहा कि जब बजट का 80 प्रतिशत हिस्सा पुलिस और गृह विभाग पर खर्च होना है तो ऐसे बजट का क्या अर्थ रह जाता है? उन्होंने कहा, ‘‘इसका मतलब है कि कश्मीर पुलिस स्टेट में तब्दील हो गया है और सरकार अभी तक आतंकवाद से जूझ रही है’’

तृणमूल सदस्य ने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने से संबंधित विधेयक को संसद में जल्दबाजी में पारित कराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में सामान्य स्थिति अभी कोसों दूर है।

उन्होंने दावा किया कि जम्मू कश्मीर पंचायती चुनाव में जो सदस्य जीत कर आये हैं उनमें से कई लोगों को यह कहकर शिविरों में रखा गया है कि उनकी जान को खतरा है।

हक ने कहा कि सरकार को जम्मू कश्मीर के लोगों से बात करनी चाहिए और वहां लोकतंत्र की बहाली करनी चाहिए।

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