नयी दिल्ली, 28 अप्रैल ओटीटी और सोशल मीडिया मंचों पर अश्लील सामग्री के प्रसारण को सोमवार को एक ‘बड़ी चिंता’ करार देते हुए उच्चतम न्यायालय ने उनपर रोक लगाने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली एक याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे से निपटने के लिए विधायिका या कार्यपालिका को उपाय करने हैं।
न्यायपालिका पर हाल के हमले की ओर परोक्ष रूप से इशारा करते हुए न्यायमूर्ति गवई ने कहा, ‘‘यह हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं है। वैसे भी, ढ़ेर सारे आरोप लग रहे हैं कि हम विधायी और कार्यकारी शक्तियों का अतिक्रमण कर रहे हैं।’’
केंद्र की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इसे वाद-प्रतिवाद के रूप में नहीं लेगी।
उन्होंने अदालत से कहा, ‘‘ कृपया यहां इस पर गौर करें । हम कुछ ऐसा लेकर आएंगे, जो अभिव्यक्ति की आजादी को संतुलित करेगा और जिसमें (अनुच्छेद) 19 (2) का भी ध्यान रखा जाएगा।’’
मेहता ने कहा कि कुछ सामग्री न केवल अश्लील होती हैं बल्कि ‘विकृत’ भी। उन्होंने कहा कि वैसे तो इस संबंध में कुछ नियमन अस्तित्व में हैं, लेकिन कुछ और नियमन पर विचार किया जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि यह कोई वाद-प्रतिवाद नहीं है और याचिका में सोशल मीडिया और ओवर-द-टॉप (ओटीटी) मंचों पर ऐसी सामग्री के प्रसारण पर गंभीर चिंता जताई गई है।
जैन ने कहा कि ऐसी सामग्री बेरोक-टोक दिखायी जा रही है।
न्यायमूर्ति गवई ने मेहता से कहा, ‘‘श्रीमान सॉलिसिटर, आपको कुछ करना चाहिए।’’
मेहता ने कहा कि अब बच्चों का इस तरह की सामग्री से अधिक पाला पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, “नियमित कार्यक्रमों में दिखाई जाने वाली कुछ चीजें, फिर चाहे वह हो या विषय-वस्तु... न केवल अश्लील, बल्कि विकृत भी होती हैं।”
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