देश की खबरें | बीसीबी में 'मजदूर', 'दाई', 'कुली' की नौकरी के लिए 15-25 लाख रुपये की रिश्वत ली गई: सीबीआई
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कर्नाटक के बेलगाम छावनी बोर्ड (बीसीबी) में ‘मजदूर’, ‘दाई’, ‘कुली’ और ‘चौकीदार’ की नौकरी के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर 15-25 लाख रुपये की रिश्वत दी है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित भर्ती घोटाले के सिलसिले में दर्ज अपनी प्राथमिकी में यह जानकारी दी है।
नयी दिल्ली, 21 जून कर्नाटक के बेलगाम छावनी बोर्ड (बीसीबी) में ‘मजदूर’, ‘दाई’, ‘कुली’ और ‘चौकीदार’ की नौकरी के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर 15-25 लाख रुपये की रिश्वत दी है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कथित भर्ती घोटाले के सिलसिले में दर्ज अपनी प्राथमिकी में यह जानकारी दी है।
एजेंसी ने शुक्रवार को सार्वजनिक की गई अपनी प्राथमिकी में बोर्ड के पांच अधिकारियों और कथित तौर पर रिश्वत देने वाले 14 अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
सीबीआई ने पिछले साल बोर्ड के एक सदस्य की शिकायत के आधार पर प्रारंभिक जांच (पीई) शुरू की थी, जिसमें 2022-23 में की गई भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और अवैधताओं का आरोप लगाया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि जांच के निष्कर्षों से पता चला है कि 2022-23 के दौरान मैकेनिक, सहायक स्वच्छता निरीक्षक, कुली, माली, चपरासी, दाई आदि पदों पर 31 अभ्यर्थियों की भर्ती की गई थी।
उन्होंने कहा कि अधिकारी अधीक्षक महालिंगेश्वर वाई तालुकदार, कंप्यूटर प्रोग्रामर बसवराज एस. गुडोदगी, डाटा एंट्री ऑपरेटर प्रकाश सी गौंडडकर, हेड मास्टर पारसराम एस. बिरजे और सहायक शिक्षक उदय एस. पाटिल के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और ये लोग तत्कालीन सीईओ द्वारा जारी आदेशों के अनुसार परीक्षा प्रक्रिया में विभिन्न क्षमताओं में काम कर रहे थे।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि छावनी बोर्ड के तत्कालीन सीईओ आनंद के (अब दिवंगत) भर्ती प्रक्रिया के लिए नियंत्रण और नियुक्ति प्राधिकारी थे, जो परीक्षा के प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी तैयार करने में शामिल थे।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि पांच अधिकारियों के साथ साजिश रचकर आनंद के. ने चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए अभ्यर्थियों से 15-25 लाख रुपये की अवैध रिश्वत मांगी और बाद में यह राशि स्वीकार भी की।
सीबीआई जांच के निष्कर्षों से पता चलता है कि प्रश्नपत्र केवल अंग्रेजी में तैयार किया गया था, लेकिन अधिकांश अभ्यर्थी इसे पढ़ और समझ नहीं सकते थे।
प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया है कि योग्य अभ्यर्थियों को या तो अस्वीकार कर दिया गया या उन्हें योग्य नहीं माना गया, क्योंकि वे उपरोक्त नामित लोक सेवकों को रिश्वत के तौर पर मांगी गयी रकम नहीं दे पाए।
इसमें यह भी कहा गया है कि देशभर से अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन सभी चयनित अभ्यर्थी केवल बेलगाम या आसपास के स्थानों से थे।
प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया है कि चयनित अभ्यर्थियों में से कई छावनी बोर्ड के अधिकारियों से संबंधित या परिचित हैं।
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