जरुरी जानकारी | सोयाबीन तिलहन में तेजी, बाकी तेल-तिलहनों में मिला-जुला रुख

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशों में बाजार मजबूत रहने के बावजूद देश के तेल-तिलहन बाजारों में सोमवार को सोयाबीन तिलहन में आई तेजी को छोड़कर अन्य तेल-तिलहनों की कीमतों में मिला-जुला रुख दिखा। एक ओर जहां सरसों तेल- तिलहन और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट आई वहीं मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल के भाव पूर्वस्तर पर ही बंद हुए।

नयी दिल्ली, छह नवंबर विदेशों में बाजार मजबूत रहने के बावजूद देश के तेल-तिलहन बाजारों में सोमवार को सोयाबीन तिलहन में आई तेजी को छोड़कर अन्य तेल-तिलहनों की कीमतों में मिला-जुला रुख दिखा। एक ओर जहां सरसों तेल- तिलहन और बिनौला तेल कीमतों में गिरावट आई वहीं मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल के भाव पूर्वस्तर पर ही बंद हुए।

कारोबारी सूत्रों ने कहा कि विदेशों में सोयाबीन डीगम तेल लगभग दो प्रतिशत मजबूत चल रहा है और देश के कारोबारी पिछले डेढ़ साल के घाटे की स्थिति के बाद अब कोई स्टॉक खरीदने से परहेज करते दिख रहे हैं क्योंकि उनकी वित्तीय हालत पतली चल रही है।

सूत्रों ने कहा कि नवंबर, दिसंबर के महीने में खासकर सॉफ्ट ऑयल (नरम खाद्यतेल) का आयात घटने के पूरे आसार हैं, देश में भी नरम तेलों का स्टॉक कम है तो आगे जाड़े की बढ़ती मांग को पूरा करने में मुश्किल आ सकती है। नरम तेलों के आयात में समय लगता है और इन्हें पाम, पामोलीन की तरह 10-15 दिन में मंगाया जाना संभव नहीं है। इन बातों को सभी जिम्मेदार लोगों एवं संगठनों को सोचना होगा। अभी की स्थिति के आने वाले दिनों में क्या परिणाम होंगे, इसको लेकर सभी की खामोशी परेशान करने वाली है।

सूत्रों ने कहा कि देश में तेल-तिलहन का उत्पादन बढ़ाना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि मौजूदा समय में जिस तरह ब्राजील में खराब मौसम की स्थिति की खबर है और ऐसे में विदेशों में खाद्य तेलों के दाम बढ़ा दिये जायें, तो स्थिति को कैसे संभालेंगे, इस बात को लेकर स्टष्टता का अभाव है। अगर देश का तेल बाजार विदेशों से निर्धारित होगा तो किसान विदेशी बाजारों की बाट जोहने के बजाय उस फसल का रुख कर सकते हैं जिसकी सुनिश्चित खपत हो सके और उन्हें अच्छी कीमत प्राप्त हो सके। इसके पीछे यह तर्क दिया जा सकता है कि पिछले साल सूरजमुखी का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अधिक होने के बावजूद किसानों ने सूरजमुखी का उत्पादन नहीं बढ़ाया।

सोमवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,650-5,700 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,700-6,775 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 15,200 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,255-2,540 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,400 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,770 -1,865 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,770 -1,880 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,895 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,375 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 7,725 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,000 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,175 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,135-5,235 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,935-5,035 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,050 रुपये प्रति क्विंटल।

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