देश की खबरें | जम्मू-कश्मीर में ‘गैर स्थानीय’ मतदाताओं का मुद्दा उठाने वाले दलों की भाजपा ने की खिंचाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. जम्मू-कश्मीर की संशोधित मतदाता सूची में ‘गैर स्थानीय’ मतदाताओं को शामिल करने का मुद्दा उठाने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) समेत अन्य दलों की खिंचाई की और आरोप लगाया कि ये दल शांति में खलल डालने के लिए दुष्प्रचार कर रहे हैं।

जम्मू, 22 अगस्त जम्मू-कश्मीर की संशोधित मतदाता सूची में ‘गैर स्थानीय’ मतदाताओं को शामिल करने का मुद्दा उठाने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) समेत अन्य दलों की खिंचाई की और आरोप लगाया कि ये दल शांति में खलल डालने के लिए दुष्प्रचार कर रहे हैं।

भाजपा की जम्मू-कश्मीर इकाई के अध्यक्ष रविंदर रैना ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि ‘स्थानीय या गैर-स्थानीय’ का कोई मुद्दा नहीं है, क्योंकि संविधान प्रत्येक नागरिक को 18 वर्ष की उम्र प्राप्त करने के बाद मतदान करने का अधिकार देता है।

रैना ने कहा, ‘‘जन प्रतिनिधि अधिनियम वर्ष 1950 में पूरे देश में लागू किया गया था और अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद इसे जम्मू-कश्मीर तक बढ़ा दिया गया, मतदाता सूची का संशोधन अधिनियम के अनुसार हो रहा है।’’

वह श्रीनगर में नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला द्वारा बुलाई गई बैठक के मद्देनजर यहां पार्टी मुख्यालय में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक की अध्यक्षता करने के बाद बोल रहे थे। अब्दुल्ला की अध्यक्षता में नौ दलों की बैठक में मतदाता सूची में ‘गैर-स्थानीय’ लोगों को शामिल करने के किसी निर्णय का

अदालत का दरवाजा खटखटाने समेत हर तरह से विरोध करने का संपकल्प जताया गया।

बैठक में नेकां, कांग्रेस, पीडीपी, अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस (एएनसी), शिवसेना, भाकपा, माकपा, जदयू और अकाली दल मान ने भाग लिया। हालांकि, सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली पीपुल्स कॉन्फ्रेंस और अल्ताफ बुखारी की ‘अपनी पार्टी’ बैठक से दूर रही।

रैना ने कहा कि बैठक में कांग्रेस नेताओं के भाग लेने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी देश के प्रति जवाबदेह हैं, क्योंकि यह अधिनियम 1950 में कांग्रेस द्वारा लागू किया गया था।

रैना ने कहा, ‘‘उनके भ्रामक प्रचार का कोई औचित्य नहीं है। जब पीडीपी के संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ सकते हैं और जीत सकते हैं और कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद महाराष्ट्र से चुने जाते हैं, तो उस समय कोई हंगामा नहीं हुआ था।’’

उन्होंने अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद स्थानीय चुनावों में मतदान का अधिकार पाने वाले पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थियों, गोरखा और वाल्मीकि समुदाय का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें 70 वर्षों में पहली बार मतदाता के रूप में खुद को पंजीकृत करने का मौका मिल रहा है।

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