मुंबई, 24 अगस्त भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने केन्द्रीय मंत्री नारायण राणे के राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने संबंधी कथित बयान से खुद को अलग कर लिया, लेकिन साथ ही कहा कि वह मंत्री के बयान पर खेद प्रकट नहीं करेंगे। वहीं, राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि भाजपा उनके बयान का समर्थन नहीं करती लेकिन जिस तरह उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, ‘‘ पार्टी 100 फीसदी उनके साथ खड़ी है।’’
पाटिल ने एक क्षेत्रीय समाचार चैनल से कहा, ‘‘ मैं राणे के बयान का बचाव नहीं कर रहा, लेकिन उसको लेकर खेद भी व्यक्त नहीं करूंगा।’’
राणे ने दावा किया था कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने संबोधन में ठाकरे यह भूल गए कि देश की आजादी को कितने साल हुए हैं और इसी संदर्भ में मंत्री ने यह विवादित बयान दिया। बयान के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद नासिक के पुलिस आयुक्त दीपक पांडे ने राणे की तत्काल गिरफ्तारी के आदेश जारी किए थे, जिसके बाद राणे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि भाजपा राणे के बयान का समर्थन नहीं करती, लेकिन केन्द्रीय मंत्री को जिस तरह निशाना बनाया जा रहा है, ‘‘पार्टी उनके साथ पूरी तरह खड़ी है।’’
फडणवीस ने भाजपा कार्यालयों पर हमलों और राणे के खिलाफ राज्य के कई हिस्सों में सड़कों पर हो रहे प्रदर्शन को ‘‘ राज्य प्रायोजित हिंसा’’ करार दिया। पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस का इस्तेमाल ‘‘बदले की राजनीति’’ के लिए किया जा रहा है। राज्य में कानून का शासन होना चाहिए, ‘‘ तालिबान जैसा शासन’’ नहीं।
वहीं, पाटिल ने इस बात को लेकर हैरानी जतायी कि राज्य सरकार किसी केन्द्रीय मंत्री को गिरफ्तार करने की योजना कैसे बना सकती है। उन्होंने पूछा, ‘‘ क्या कोई प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है?’’
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘राणे पर उंगली उठाने वाले लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि उद्धव ठाकरे द्वारा भड़काऊ भाषण दिए जाने के कई उदाहरण हैं।’’
राणे ने रायगढ़ जिले में सोमवार को ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ के दौरान कहा, ‘‘ यह शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को यह नहीं पता कि आजादी को कितने साल हुए हैं। भाषण के दौरान वह पीछे मुड़ कर इस बारे में पूछते नजर आए थे। अगर मैं वहां होता तो उन्हें एक जोरदार थप्पड़ मारता।’’
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके राणे पहले शिवसेना में थे, जो बाद में कांग्रेस में और फिर, 2019 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए।
शिवसेना कार्यकर्ताओं ने राज्य के कई हिस्सों में राणे के बयान के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। इस मामले को लेकर मुंबई में राणे के आवास के पास शिवसेना और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प भी हुई। भाजपा के नासिक कार्यालय पर पथराव के अलावा, शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने नागपुर में भी प्रदर्शन किया।
फडणवीस ने आरोप लगाया कि ‘‘ पुलिस हमला करने वालों को बचा रही है, जैसा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद राज्य सरकार द्वारा की गई हिंसा के बाद हुआ था।’’
भाजपा नेता ने कहा, ‘‘ राणे ने शायद अनजाने में और भावनाओं में बहकर उन शब्दों का इस्तेमाल किया। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के आजादी को कितने साल हुए हैं, यह भूल जाने को लेकर वह दूसरे तरीके से अपनी नाराजगी जाहिर कर सकते थे।’’ उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री पद पर काबिज व्यक्ति की आलोचना करते समय संयम बरतना चाहिए।
मुंबई में भाजपा के विधायक राम कदम ने केन्द्रीय मंत्री का बचाव करते हुए कहा, ‘‘ राणे को उनकी अक्रामकता के लिए पहचाना जाता है। उनके शब्दों के चुनाव को लेकर विचारों में मतभेद हो सकता है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ के शुरू होने के बाद से ही ठाकरे नीत महाराष्ट्र सरकार सत्ता का गलत इस्तेमाल कर राणे की रैली में अवरोध उत्पन्न करने की कोशिश कर रही है। विधायक ने एक समाचार चैनल से बातचीत में दावा किया, ‘‘ यह राज्य सरकार की धोखाधड़ी है। राज्य सरकार रैली को मिल रही व्यापक प्रतिक्रिया से डरी हुई है।’’
उन्होंने दावा किया कि ठाकरे ने मुख्यमंत्री के तौर पर कई बार विवादित भाषण दिये हैं और भड़काऊ का इस्तेमाल भी किया है लेकिन इसे अनदेखा कर दिया गया।
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