देश की खबरें | भाजपा ने मप्र में 2023 के विधानसभा चुनाव में 51 प्रतिशत मत और अबकी बार 200 पार का लक्ष्य तय किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गुजरात में पार्टी की जबरदस्त जीत से उत्साहित मध्य प्रदेश में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कुल 230 सीटों में से 200 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य तय करते हुए ‘‘अबकी बार 200 पार’’ का नारा दिया है।

भोपाल, 18 दिसंबर गुजरात में पार्टी की जबरदस्त जीत से उत्साहित मध्य प्रदेश में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कुल 230 सीटों में से 200 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य तय करते हुए ‘‘अबकी बार 200 पार’’ का नारा दिया है।

लगभग पिछले 20 साल से मध्य प्रदेश में सत्तारुढ़ भाजपा ने 2023 के अंत में होने वाले चुनावों में 51 प्रतिशत मत हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

शनिवार को कटनी में पार्टी की कार्यसमिति की बैठक के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पार्टी ने अगले साल मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में 51 फीसदी मत हासिल करने तथा 200 से ज्यादा सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।’’

उन्होंने कहा कि पार्टी को गुजरात में 53 प्रतिशत वोट मिले थे और भारी जीत के साथ वहां फिर से इतिहास लिखा। मध्य प्रदेश में अबकी बार 200 पार का लक्ष्य रखा गया है।

गुजरात में भाजपा ने 182 सीटों में से 156 पर जीत हासिल की।

बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और अन्य नेता मौजूद थे, पार्टी ने 200 से अधिक सीटें जीतने का संकल्प लिया।

15 साल सत्ता में रहने के बाद भाजपा मध्य प्रदेश में 2018 का विधानसभा चुनाव हार गई थी जिससे कांग्रेस के लिए कमलनाथ के नेतृत्व में निर्दलीय, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) विधायकों की मदद से सरकार बनी। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के वफादार लगभग दो दर्जन कांग्रेस के विधायकों के विद्रोह और कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होने से कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई। इसके बाद राज्य में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी।

वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 40.89 प्रतिशत वोट तथा 114 सीटें हासिल की जबकि भाजपा को 41.02 प्रतिशत मत तथा 107 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा था और भाजपा को 15 माह तक विपक्ष में बैठना पड़ा। सिंधिया और उनके समर्थक विधायकों के कांग्रेस छोड़ने के कारण भाजपा वापस राज्य में सत्ता में आ सकी।

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