गुवाहाटी, 25 फरवरी असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शनिवार को संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) संयंत्रों को वैकल्पिक ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत बताया।
उन्होंने वैश्विक तापमान में वृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग) और पर्यावरण प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने के लिए नवीकरणीय और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।
गुवाहाटी के सोनापुर के डोमोरा पाथेर में एक सीबीजी इकाई के शिलान्यास समारोह में उन्होंने कहा, "ग्लोबल वार्मिंग से उत्पन्न खतरों के मद्देनजर, लोगों को जीवाश्म ईंधन का कम उपयोग करना चाहिए और ईंधन और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अन्य स्रोतों पर अधिक ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बायोगैस इकाइयों का "स्थानीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ता है क्योंकि कच्चा माल, जैसे ठोस अपशिष्ट, गाय का गोबर, घास आदि आसपास के क्षेत्रों से प्राप्त किया जाता है।"
केंद्र की 'वहनीय परिवहन की दिशा में सतत विकल्प (एसएटीएके) योजना' के तहत सोनापुर में स्थापित की जा रही बायोगैस इकाई इस साल नवंबर तक शुरू हो जाएगी।
सीबीजी पर एसएटीएके योजना 1 अक्टूबर, 2018 को शुरू की गई थी। इस कार्यक्रम में 2023 तक 5,000 संयंत्रों से 15 एमएमटी (मिलियन टन) सीबीजी के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध हमारे जैसे राज्य के लिए हमें स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान देना चाहिए और हमारी सरकार इस दिशा में काम कर रही है।"
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)












QuickLY