ताजा खबरें | छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजातियों से संबंधित विधेयक राज्यसभा में पारित
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. राज्यसभा ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में धनुहार, धनुवार, किसान, सौंरा, साओंरा और बिंझिया समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने वाले संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022 को मंजूरी दे दी।
नयी दिल्ली, 25 जुलाई राज्यसभा ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ में धनुहार, धनुवार, किसान, सौंरा, साओंरा और बिंझिया समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने वाले संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022 को मंजूरी दे दी।
राज्यसभा में इस विधेयक को चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित किया गया। विधेयक पर चर्चा के दौरान मणिपुर हिंसा पर चर्चा की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया ।
भोजनावकाश के बाद जब उच्च सदन की कार्यवाही फिर से शुरू हुई तो केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022 को चर्चा और पारित कराने के लिए पेश किया।
मणिपुर पर चर्चा की मांग को लेकर सदन में हंगामा जारी रखने वाले विपक्षी सदस्यों ने हंगामे के बीच विधेयक के पारित होने पर आपत्ति जताई और सदन से बहिर्गमन किया।
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे मणिपुर का मुद्दा उठाने के लिए खड़े हुए और कहा कि वह विधेयक का समर्थन करते हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सदन में आना चाहिए और पूर्वोत्तर राज्य में हिंसा पर बोलना चाहिए। इस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि खरगे का माइक बंद कर दिया गया और उन्हें अपनी बात पूरी नहीं करने दी गई।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ट्वीट किया, ‘‘राज्यसभा में आज दोपहर भाजपा सांसदों ने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को बोलने से रोका और उन्हें मणिपुर पर सदन में प्रधानमंत्री के बयान के ‘इंडिया’ के को उठाने से भी रोका।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सदन के नेता के उकसावे पर बार-बार बाधा डालने और हंगामे में विधेयकों को पारित करने की जिद के कारण ‘इंडिया’ के सभी सांसदों ने पूरे दिन सदन से बहिर्गमन किया।’’
पिछले साल दिसंबर में लोकसभा ने संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (पांचवां संशोधन) विधेयक, 2022 को ध्वनिमत से पारित कर दिया था। विधेयक में धनुहार, धनुवार, किसान, सौंरा, साओंरा और बिंझिया समुदायों को छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल करने का प्रावधान है।
इसमें भुनिया, भुइयां और भुयां को भारिया भूमिया समुदाय के पर्यायवाची के रूप में औपचारिक रूप देने का भी प्रयास किया गया है। इसमें पांडो समुदाय के नाम के तीन देवनागरी संस्करण भी शामिल हैं।
चर्चा में भाग लेते हुए बीजू जनता दल के निरंजन बिशी ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के लिए लाभकारी होगा। इसी तरह, वाईएसआरसीपी के आर कृष्णैया ने विधेयक का समर्थन किया।
भाजपा के समीर उरांव ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि आजादी के बाद से आदिवासी विकास से वंचित रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने उनके विकास के लिए कई कदम उठाए हैं।
तेदेपा के कनकमेदला रवींद्र कुमार ने आंध्र प्रदेश में आदिवासियों की समस्याओं से जुड़े मुद्दों को उठाने का प्रयास किया लेकिन उपसभापति हरिवंश ने उन्हें केवल विधेयक पर बोलने को कहा।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरोज पांडे और किरोड़ी लाल मीणा ने भी चर्चा में भाग लिया और देश भर में आदिवासियों के विकास के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रकाश डाला।
विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने नरेंद्र मोदी सरकार की जनजातियों के कल्याण के लिए विभिन्न कदम उठाये जाने की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पूर्व में भी देश के विभिन्न हिस्सों में आदिवासियों को जनजातियों की सूची में डालने के प्रावधान वाले विधेयक लायी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के कुछ आदिवासियों को इस सूची में डालने के लिए लाया गया यह विधेयक उन्हीं प्रयासों के तहत है।
उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार कुछ अन्य राज्यों के आदिवासियों के लिए भी ऐसे ही प्रावधान वाले विधेयक लाने की तैयारी में है।
विधेयक को पारित किए जाने के बाद सदन की कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
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