देश की खबरें | बिहार : जाति जनगणना के फैसले का श्रेय लेने के लिए पटना में ‘‘पोस्टर वार’’
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. बिहार की राजधानी पटना में सड़कों पर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और विपक्षी इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ताओं के बीच पोस्टर लगाने की होड़ शुरू हो गई है, जिसमें हर कोई आगामी जनगणना में जाति आधारित डेटा को शामिल करने के केंद्र के फैसले का श्रेय ले रहा है।
पटना, एक मई बिहार की राजधानी पटना में सड़कों पर सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) और विपक्षी इंडिया गठबंधन के कार्यकर्ताओं के बीच पोस्टर लगाने की होड़ शुरू हो गई है, जिसमें हर कोई आगामी जनगणना में जाति आधारित डेटा को शामिल करने के केंद्र के फैसले का श्रेय ले रहा है।
केंद्र सरकार ने बुधवार को घोषणा की कि जाति गणना आगामी जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा होगी। केंद्र के इस फैसले के प्रतिक्रिया स्वरूप बिहार की राजधानी में राजनीतिक दलों के कार्यालयों को पोस्टरों से सजाया गया है।
जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यालय के बाहर बृहस्पतिवार को एक पोस्टर लगाया गया, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दोनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
पोस्टर में लिखा गया, ‘‘ नीतीश ने कर दिखाया, अब देश में भी वही अपनाया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का धन्यवाद। बिहार से लेकर भारत में जाति जनगणना। ’’
इस बीच, विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कांग्रेस ने भी अपने-अपने कार्यालयों के बाहर पोस्टर लगाए, जिसमें यह निर्णय लेने के लिए केंद्र पर दबाव डालने का श्रेय अपने नेताओं को दिया गया।
राजद के एक पोस्टर में लिखा गया, ‘‘ लोग झुकते हैं, उन्हें झुकाने के लिए कोई चाहिए। आखिरकार केंद्र सरकार ने लालू और तेजस्वी की बात मान ली। इसका श्रेय लालू और तेजस्वी को जाता है।’’
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपने जश्न को एक कदम आगे बढ़ाते हुए पार्टी की राज्य इकाई के कार्यालय के बाहर राहुल गांधी के पोस्टर पर दूध डाला और उनकी प्रशंसा की। एक अन्य पोस्टर में भी जाति जनगणना के फैसले के लिए राहुल गांधी का आभार जताया गया।
राजद और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के इन दावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता एवं बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘आगामी जनगणना में जाति आधारित आंकड़े शामिल करने के निर्णय का श्रेय हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ही जाता है। अगर लालू कहते हैं कि 1995-96 में जाति आधारित जनगणना पास हुई थी, तो उसे लागू क्यों नहीं किया गया? 10 साल तक केंद्र में कांग्रेस की सरकार लालू के समर्थन में थी - जाति आधारित जनगणना आगे क्यों नहीं बढ़ी?
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