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24 जुलाई की बड़ी खबरें

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24 जुलाई की बड़ी खबरें
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत और दुनिया की बड़ी खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.छात्रों के प्रदर्शन के बीच दिल्ली के कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं ठप

26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, मोदी का पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई का वादा

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ी सीजेपी, आंदोलन जारी रखने का एलान

"याचिका दाखिल ही नहीं हुई": पुलिस कार्रवाई मामले में सीजेआई ने खबरों को बताया भ्रामक

भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार, 24 जुलाई को उन खबरों को भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना बताया, जिनमें दावा किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को दिल्ली में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई के मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया है. अदालत में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि पिछले दो दिनों से यह गलत प्रचार किया जा रहा है कि इस मामले में याचिका दाखिल की गई थी और चीफ जस्टिस ने उसे सूचीबद्ध करने से मना कर दिया था, जबकि वास्तविकता यह है कि सुप्रीम कोर्ट में कोई याचिका दायर ही नहीं की गई थी.

दिल्ली पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारी से यौन दुर्व्यवहार का आरोप

चीफ जस्टिस ने साफ किया कि अदालत के रिकॉर्ड की जांच के बाद यह पाया गया कि सुबह 10 बजे तक इस मामले में एक भी पन्ने की याचिका दाखिल नहीं हुई थी. उन्होंने कहा कि केवल एक प्रतिनिधित्व भेजा गया था, जिसे रिट याचिका नहीं माना जा सकता. चीफ जस्टिस ने सवाल उठाया कि बिना याचिका दाखिल हुए अदालत के रुख को लेकर इस तरह की खबरें कैसे प्रकाशित की जा सकती हैं और इसे "लापरवाह रिपोर्टिंग" करार दिया.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की यह टिप्पणी उस घटना के संदर्भ में आई, जब बुधवार को एक वकील ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस ज्यादती का मुद्दा अदालत के समक्ष उठाने की कोशिश की थी. बेंच ने बताया कि वकील ने केवल एक पत्र भेजा था और कोई औपचारिक याचिका दाखिल नहीं की थी. जब वकील ने इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि उनके पास वीडियो भी हैं, तब भी अदालत ने बिना विधिवत याचिका के मामले पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. इस दौरान बेंच में जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे. हालांकि चीफ जस्टिस ने यह नहीं बताया कि क्या इस मामले को स्वत: संज्ञान में क्यों नहीं लिया जा सका?

जंतर-मंतर के प्रदर्शनों में शामिल न हों, डीयू और जेएनयू ने जारी की एडवाइजरी

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) ने नीट पेपर लीक मामले को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भाग नहीं लेने की सलाह दी है. जेएनयू ने शुक्रवार को जारी अपने एडवाइजरी में कहा कि विश्वविद्यालय समुदाय के सभी सदस्य जिम्मेदार व्यवहार करें और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को प्राथमिकता दें. विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए छात्रों और कर्मचारियों से जंतर-मंतर तथा उसके आसपास होने वाले प्रदर्शनों से दूर रहने का अनुरोध किया है.

जेएनयू ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी सतर्कता बरतने की सलाह दी है. विश्वविद्यालय ने कहा कि लागू कानूनों का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति को कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ विश्वविद्यालय की आचार संहिता के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है.

विश्वविद्यालय ने अपने छात्रों और कर्मचारियों से शैक्षणिक जिम्मेदारी और जिम्मेदार नागरिकता के मूल्यों का पालन करने की अपील की है. इससे पहले आईआईटी रुड़की और दिल्ली विश्वविद्यालय भी इसी तरह के निर्देश जारी कर चुके हैं.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली विश्वविद्यालय की इस एडवाइजरी की आलोचना की है. उन्होंने डीयू की सोशल मीडिया पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि छात्रों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने पर धमकाना उचित नहीं है.

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, "लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को धमकाने की हिम्मत कैसे हुई? याद रखिए, समय आने पर आपको जवाबदेह ठहराया जाएगा."

युर्गेन क्लॉप को बनाया जा सकता है जर्मनी का नया फुटबॉल कोच

लीवरपूल के पूर्व मैनेजर युर्गेन क्लॉप को जर्मनी का नया फुटबॉल कोच बनाया जा सकता है. जर्मनी की फुटबॉल फेडरेशन शुक्रवार सुबह एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में घोषणा कर सकती है कि वे क्लॉप के साथ एक अनुबंध पर सहमत हो गए हैं. साल 2024 में लीवरपूल छोड़ने के बाद यह युर्गेन क्लॉप की पहली कोचिंग जॉब होगी और उनके ऊपर जर्मन फुटबॉल टीम के प्रदर्शन को सुधारने की जिम्मेदारी होगी.

जर्मन मीडिया ने जानकारी दी है कि यह डील साल 2028 की यूरोपियन चैंपियनशिप और 2030 के विश्वकप तक के लिए होगी. हालिया विश्वकप में जर्मनी के प्रदर्शन की आलोचना होने के बाद टीम के कोच व मैनेजर यूलियान नागेल्समान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. जर्मन टीम राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में पैराग्वे से हारकर बाहर हो गई थी. साल 2014 में विश्वकप जीतने के बाद से जर्मनी ने टूर्नामेंट में कोई नॉकआउट मुकाबला नहीं जीता है.

अमेरिका ने 60 सहयोगियों पर 12.5 फीसदी तक टैरिफ लगाया

अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार, 24 जुलाई को 60 व्यापारिक सहयोगियों से आने वाले सामानों पर 10 से 12.5 फीसदी तक टैरिफ लगाया. जिन सहयोगियों पर टैरिफ लगे हैं, उनमें यूरोपीय संघ, चीन, ताइवान, जापान, भारत और पाकिस्तान जैसे कई देश शामिल हैं. अमेरिका का आरोप है कि इन सहयोगियों ने जबरन मजदूरी से बनी वस्तुओं पर लगे प्रतिबंधों को सही तरीके से लागू नहीं किया.

इन नए टैरिफों की घोषणा तब हुई है जब ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाया गया अस्थायी 10 फीसदी टैरिफ शुक्रवार को खत्म हो गया. अस्थायी टैरिफ के खत्म होते ही नए टैरिफ लागू हो गए. विदेशों से आने वाले सामानों पर टैरिफ लगाना अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नीति का एक अहम हिस्सा है. पिछले साल उन्होंने विभिन्न देशों पर 10 से 50 फीसदी तक टैरिफ लगाए थे, जिन्हें इस साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था.

नए लगाए गए टैरिफ अमेरिकी आयात के 99.4 फीसदी हिस्से को कवर करते हैं लेकिन इसमें तेल, गैस, उर्वरक और कई खाद्य पदार्थों को छूट दी गई है. ट्रेड एक्ट, 1974 के सेक्शन 301 के तहत ये टैरिफ लगाए गए हैं. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इन टैरिफों को अदालत द्वारा खारिज किए जाने का जोखिम भी कम है. यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कलास ने इस नए टैरिफ का विरोध किया है.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ी सीजेपी, आंदोलन जारी रखने का एलान

सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन लंबी भूख हड़ताल समाप्त किए जाने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने अपना आंदोलन जारी रखने का एलान किया है. पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि उनका विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा, जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते. उन्होंने वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर राहत जताते हुए कहा कि उनकी जान देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन आंदोलन की मूल मांग में कोई बदलाव नहीं आया है.

दीपके ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के साथ किसी भी तरह की बातचीत तटस्थ स्थान पर ही होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी स्वीकार नहीं किया जाएगा. वहीं, सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने बताया कि जंतर-मंतर पर चल रहा धरना जारी रहेगा और जेपी नड्डा तथा केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के साथ प्रस्तावित बैठक में हुई चर्चा की जानकारी मीडिया को दी जाएगी.

सीजेपी प्रवक्ता दीपक बालियान ने भी आंदोलन को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की बात दोहराई. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट-ट्रैक अदालतों में मामलों की सुनवाई के आश्वासन को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि देश के युवा अब ऐसे वादों पर भरोसा नहीं करते. पार्टी का कहना है कि कथित परीक्षा अनियमितताओं के लिए जवाबदेही तय होना और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलन की प्रमुख मांग है, जिसके पूरा होने तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.

छात्रों के प्रदर्शन के बीच दिल्ली के कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं ठप

भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने सेंट्रल दिल्ली के हिस्सों और प्रदर्शन स्थल के आसपास मोबाइल डेटा सेवाएं बंद करने का आदेश दिया है. इस मामले से जुड़े दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि टेलीकॉम कंपनियों ने सरकारी निर्देश का पालन करते हुए संबंधित इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं.

मेशकोर: बिना इंटरनेट के चलने वाला नेटवर्क

सरकार और दूरसंचार विभाग के प्रवक्ताओं ने इस संबंध में रॉयटर्स के सवालों का तुरंत जवाब नहीं दिया. वहीं, देश की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने भी इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की. गुरुवार शाम केंद्रीय दिल्ली के कई इलाकों में मोबाइल डेटा सेवाएं बाधित रहीं, जिसकी पुष्टि रॉयटर्स के पत्रकारों ने भी की.

मोबाइल इंटरनेट बंद होने से स्थानीय दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और रेस्तरां संचालकों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने में परेशानी का सामना करना पड़ा. प्रदर्शनकारी जून महीने से केंद्रीय दिल्ली के जंतर पर डेरा डाले हुए हैं और मई में हुई कथित नीट पेपर लीक की घटनाओं को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

26 दिन बाद सोनम वांगचुक ने खत्म किया अनशन, मोदी का पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई का वादा

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार, 23 जुलाई की देर रात 26 दिनों से जारी अनशन तोड़ दिया. सोनम ने अनशन तोड़ने का फैसला केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद लिया.

सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के समर्थन में 28 जून को अनशन शुरू किया था. इसी बीच तबीयत खराब होने के बाद सोनम को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सोनम को मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

दिल्ली पुलिस पर महिला प्रदर्शनकारी से यौन दुर्व्यवहार का आरोप

सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "अभी-अभी केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह तथा लेह-लद्दाख की सर्वोच्च समिति के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में मैंने 26 दिनों के बाद अपना अनशन तोड़ा. इससे पहले विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों ने मुझसे मुलाकात की थी या पत्र लिखकर मुझसे अनशन तोड़ने का आग्रह किया था.”

उन्होंने आगे लिखा, “यह देश में संभावित हिंसा को देखते हुए और विभिन्न शर्तों पर लंबी बातचीत के बाद किया गया. मैं जल्द ही एक अलग वीडियो में इन शर्तों को विस्तार से बताऊंगा. इस बीच, मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि किसी भी प्रकार की हिंसा को रोकने के लिए पूरी तरह सतर्क रहें."

इससे पहले गुरुवार की देर रात पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी करके देश के युवाओं, छात्रों और अभिभावकों को पेपर लीक पर रोक लगाने से जुड़े बड़े कदम उठाने की जानकारी दी थी. पीएम मोदी ने कहा कि इससे जुड़ा एक मसौदा शुक्रवार को होने वाली कैबिनेट की मीटिंग में पेश किया जाएगा.

पीएम मोदी ने कहा कि मैं जानता हूं कि पेपर लीक मामूली विषय नहीं है, लाखों छात्र और उनके अभिभावकों के लिए बहुत ही पीड़ादायक है इसलिए पेपर लीक की घटना से निपटने को लेकर अब तक पिछले ढाई महीने में अनेक कदम उठाए गए, गुनाहगारों को पकड़ा गया है, वे जेल में हैं. हमारा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मा था कि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो.

उन्होंने आगे कहा कि तत्काल परीक्षा लेना जरूरी था, सरकार ने पूरी शक्ति का प्रयोग करके कम से कम समय में 22 लाख छात्रों की परीक्षा का प्रबंध किया. 5 से 6 दिन पहले, 19 को नतीजे भी आ गए. देश भर में पास हुए छात्रों की खुशियों की खबरें भी आ रही हैं. लेकिन हम संतोष मानने वाले लोगों में से नहीं हैं इसलिए मैंने आज विभागों को निर्देश दिए थे. आज विभागों ने लगातार मेहनत करके देर रात अपने मसौदे दे दिए.

उन्होंने बताया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रावधान के साथ मसौदे पर शुक्रवार को कैबिनेट में चर्चा होगी. कैबिनेट के साथियों के सुझाव के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा. सोमवार से संसद का दूसरा सप्ताह शुरू हो रहा है, तब जल्द से जल्द इस बिल को सदन में पारित कराने का प्रयास किया जाएगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 24, 2026 04:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).