2 मार्च की बड़ी खबरें और न्यूज अपडेट

अमेरिकी सेना ने कहा है कि कुवैत के एयर डिफेंस ने गलती से उसके तीन लड़ाकू विमान गिराए हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

अमेरिकी सेना ने कहा है कि कुवैत के एयर डिफेंस ने गलती से उसके तीन लड़ाकू विमान गिराए हैं. जानिए , 3 मार्च की बड़ी खबरें और अहम न्यूज अपडेट्स यहां.कुवैती एयर डिफेंस ने गलती से मारे तीन अमेरिकी लड़ाकू विमान

ओमान तट के पास तेल टैंकर पर हमला, एक भारतीय की मौत

सऊदी अरब की सबसे बड़ी घरेलू रिफाइनरी पर ड्रोन हमला

कुवैत में कई अमेरिकी लड़ाकू विमान क्रैश

ईरान ने कहा, अब अमेरिका से बातचीत नहीं करेंगे

हिज्बुल्लाह के हमले के बाद इस्राएल की जवाबी कार्रवाई, लेबनान में 31 की मौत

ईरान के खिलाफ अपने साझेदारों की मदद करेंगे ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी

ओमान तट के पास तेल टैंकर पर हमला, एक भारतीय की मौत

गल्फ ऑफ ओमान में मार्शल द्वीप-ध्वज वाला तेल टैंकर "एमकेडी VYOM" सोमवार को एक बम से लैस ड्रोन बोट के हमले का शिकार हुआ, जिसमें एक भारतीय क्रू सदस्य की मौत हो गई. यह घटना मस्कट तट के पास हुई, जिसकी पुष्टि ओमान न्यूज एजेंसी ने की. टैंकर पर हुए इस हमले के बाद जहाज के इंजन रूम में विस्फोट हुआ और आग लगी, जिससे एक भारतीय चालक दल सदस्य की मौत हो गई.

हमले के समय टैंकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग से होकर गुजर रहा था और इस क्षेत्र में पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है. ईरान ने हाल के हफ्तों में होरमुज जलडमरूमध्य के आसपास चलने वाले जहाजों को धमकियां दी हैं, और माना जा रहा है कि वह क्षेत्र में कई हमले कर चुका है. यह स्थिति तब और तनावपूर्ण हुई जब इस्राएल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए. अधिकारियों के अनुसार, टैंकर को संदिग्ध मानवरहित नाव द्वारा निशाना बनाया गया.

कुवैती एयर डिफेंस ने गलती से मारे तीन अमेरिकी लड़ाकू विमान

अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के मुताबिक, अमेरिका के तीन लड़ाकू विमान गलती से कुवैत के एयर डिफेंस का शिकार हुए. अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरानी हमले के दौरान जारी फायरिंग में यह हादसा हुआ. इससे पहले सोमवार को कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका के कई लड़ाकू विमान उसकी जमीन पर क्रैश हुए हैं.

कुवैत के रक्षा मंत्रालय के बयान के कुछ घंटे बाद इस पर सफाई देते हुए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा, "तीन अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल जो ऑपरेशन एपिक फरी को सपोर्ट कर रहे थे, वे कुवैत के ऊप फ्रेंडली फायर का शिकार होकर गिर गए. यह सक्रिय लड़ाई के दौरान हुआ- जिसमें ईरानी विमान, बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन शामिल थे. इस दौरान कुवैती एयर डिफेंस ने गलती से अमेरिकी वायु सेना के लड़ाकू विमानों को मार गिराया."

अमेरिका सेना के मुताबिक, "कुवैत ने इस घटना को स्वीकार किया है और हम इस जारी ऑपरेशन में कुवैती सुरक्षा बलों के प्रयासों और सहयोग के आभारी हैं." अमेरिकी सेना के मुताबिक विमानों में सवार सभी छह वायु सैनिक सुरक्षित हैं.

सऊदी अरब की सबसे बड़ी घरेलू रिफाइनरी पर ड्रोन हमला

सऊदी अरब ने अपनी सबसे बड़ी घरेलू तेल रिफाइनरी बंद कर कर दी है. सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी आरामको की इस रिफाइनरी पर सोमवार को ड्रोन हमला हुआ. रास तानुरा नाम की यह रिफाइनरी हर दिन 5,50,000 बैरल तेल उत्पादन करती थी. सऊदी अरब के अधिकारियों का कहना है कि रिफाइनरी को एहतियातन बंद किया गया है.

इराक के कुर्दिस्तान में भी दो लाख बैरल प्रतिदिन का उत्पादन करने वाली एक रिफाइनरी को अस्थायी रूप से बंद किया गया है. इस्राएल सरकार ने भी शेवरॉन कंपनी को अपना बड़ा गैस फील्ड कुछ समय तक बंद करने के लिए कहा है.

ईरान युद्ध के चलते खाड़ी के देशों से होने वाली तेल और गैस की सप्लाई बाधित हो रही है. ईरान और ईरान समर्थित गुटों ने फारस की खाड़ी में भी कुछ तेल टैंकरों को निशाना बनाया है. तीन दिन से जारी इस युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे के तेल के दाम 10 फीसदी बढ़ चुके हैं.

ब्राजील में बारिश से भारी तबाही, भूस्खलन में 70 मारे गए

दक्षिण-पूर्वी ब्राजील में भारी बारिश से आए भूस्खलन में 70 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें 13 बच्चे शामिल हैं, जबकि हजारों लोग बेघर हो गए हैं. सबसे अधिक प्रभावित शहर जुईज दे फोरा और उबा हुए, जहां घरों को मिट्टी और मलबे ने बहा दिया. राष्ट्रपति लुईज इनासियो लूला दा सिल्वा ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की.

लूला ने घोषणा की कि जिन लोगों के घर नष्ट हो गए हैं उन्हें सरकार की ओर से बिना शुल्क नए घर दिए जाएंगे, वह भी सुरक्षित स्थानों पर. उन्होंने कहा कि जीवन की हानि की भरपाई संभव नहीं, लेकिन सरकार लोगों को सम्मानपूर्वक रहने का अधिकार देगी. दमकल विभाग के अनुसार, 3,800 से अधिक लोग बेघर हो चुके हैं, जबकि तीन लोग अब भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है.

यह त्रासदी ब्राजील में चरम मौसम घटनाओं की बढ़ती श्रृंखला का हिस्सा है, जिसे वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन से जोड़ते हैं. मौसम विभाग के अनुसार, इस फरवरी में क्षेत्र में कई वर्षों की सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई है. जुईज दे फोरा में बारिश का स्तर 760 मिमी पार कर चुका है, जो औसत से तीन गुना अधिक है. विशेषज्ञों के मुताबिक, अटलांटिक महासागर के असामान्य रूप से गर्म होने और गुजरती ठंडी हवाओं के कारण बारिश में यह असामान्य इजाफा हुआ है.

उत्तरी पाकिस्तान के शहरों में तीन दिन का कर्फ्यू, सेना तैनात

पाकिस्तान में प्रशासन ने गिलगित बल्तिस्तान क्षेत्र में सेना तैनात करते हुए तीन दिन का कर्फ्यू लगा दिया है. सोमवार सुबह से लागू किया गया कर्फ्यू बुधवार तक जारी रहेगा. पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अकबर नासिर खान ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे घरों में ही रहें.

शनिवार रात, इस्राएल और अमेरिका के हमलों में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्लाह अली खमेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में बेहद हिंसक प्रदर्शन हुए. रविवार को कई जगह हुए इन प्रदर्शनों में कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई. पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में उग्र प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी कॉन्सुलेट में घुसने और उसे आग लगाने की कोशिश की. इस दौरान सेना व पुलिस के साथ झड़प में 10 लोग मारे गए. लाहौर कॉन्सुलेट में भी आग लगाने की कोशिश की गई.

वहीं, पाकिस्तान के उत्तरी शहरों गिलगित और स्कार्दू में भी गुस्साई भीड़ ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े कार्यालयों पर हमला करने की कोशिश की. गिलगित में भीड़ ने एक पुलिस स्टेशन, स्कूल और स्थानीय सेवार्थ संस्था के दफ्तर को आग लगा दी. स्कार्दू में यूएन डेवलपमेंट प्रोग्राम के दफ्तर को निशाना बनाने की कोशिश की गई. पाकिस्तान की पुलिस के मुताबिक गिलगित बल्तिस्तान में हुई हिंसा में कम से कम 12 लोग मारे गए और 80 घायल हुए हैं.

रविवार को हुई हिंसा के बाद पाकिस्तान में कराची, पेशावर और लाहौर स्थित अमेरिकी कॉन्सुलेट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

मोदी और कार्नी की मुलाकात

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत दौरे के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के "विस्तार" को ऐतिहासिक करार दिया है. नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात के बाद कार्नी ने कहा कि पिछले एक वर्ष में भारत‑कनाडा के बीच जितनी उच्चस्तरीय बातचीत हुई है, उतनी पिछले दो दशकों में नहीं हुई. दोनों नेताओं की उपस्थिति में एक महत्वपूर्ण यूरेनियम आपूर्ति समझौते पर भी हस्ताक्षर हुए, जिसे ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

कार्नी ने संयुक्त बयान में कहा कि यह सिर्फ रिश्तों का पुनर्जीवन नहीं, बल्कि एक नए दौर की शुरुआत है. उन्होंने जोर दिया कि भारत और कनाडा "दो आत्मविश्वासी राष्ट्र" हैं, जो भविष्य के लिए अपनी साझेदारी को नई दिशा दे रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस सहयोग का स्वागत करते हुए कहा कि रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्रों में दोनों देशों की साझेदारी तेजी से मजबूत हो रही है.

इससे पहले कनाडाई पीएम ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने भारत-कनाडा के बीच साझेदारी को लेकर बातचीत की. मुलाकात के बाद डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "आज सुबह नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मिलकर बहुत खुशी हुई. आगे की साझेदारी बनाने के उनके प्रतिबद्धता की सराहना करता हूं."

फ्रांस ने कहा, इस्राएल और अमेरिका के "एकतरफा" हमलों पर बहस होनी चाहिए थी

फ्रांस के विदेश मंत्री जाँ नोएल बारो ने कहा कि ईरान पर इस्राएल और अमेरिका के "एकतरफा" हमलों पर संयुक्त राष्ट्र में बहस होनी चाहिए थी. फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएं इसी उद्देश्य के लिए हैं.

सोमवार को पेरिस में विदेश मंत्रालय की एक बैठक के बाद बारो ने पत्रकारों से कहा, "हर कोई अपनी जिम्मेदारी ले सकता था क्योंकि सुरक्षा परिषद के सामने जाने के बाद ही ऐसी ताकत के इस्तेमाल को वैधता मिलती है."

हालांकि, इस तल्खी के साथ ही उन्होंने खाड़ी स्थित फ्रांस के मित्र देशों की रक्षा करने का एलान भी किया. बारो ने कहा कि जरूरत पड़ी तो फ्रांस खाड़ी देशों और जॉर्डन की ईरान से रक्षा करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, "ऐसे साझेदार देश, जिन्हें रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के ड्रोन और मिसाइल हमलों में, बिना चाहे इन युद्ध में घसीट लिया है- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, इराक, बहरीन, कुवैत, ओमान और जॉर्डन- फ्रांस उन्हें अपना पूरा सहयोग और पूरा बंधुत्व देता है. फ्रांस उनकी रक्षा के लिए तैयार खड़ा है."

फ्रांस के साथ ही जर्मनी और ब्रिटेन ने भी रविवार को कहा कि वे खाड़ी में अपने और अपने सहयोगी देशों के हितों की रक्षा के लिए तैयार हैं.

ईरान युद्ध: चीन ने संघर्षविराम और बातचीत की अपील की

तीसरे दिन में दाखिल हो चुके ईरान युद्ध के बीच चीन ने सभी पक्षों से संघर्षविराम और कूटनीतिक बातचीत की अपील की है. अमेरिका और इस्राएल, ईरान और लेबनान पर हमले कर रहे हैं. इन हमलों के जवाब में ईरान और उसके समर्थित गुट मध्य पूर्व के कई देशों पर हमले कर रहे हैं.

सोमवार को चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बीजिंग में कहा, "अभी सबसे जरूरी काम है सैन्य अभियानों में तुरंत संघर्षविराम और इस संघर्ष को फैलने और छितरने से रोकना." चीनी विदेश मंत्रालय के मुताबिक इस संघर्ष में अब तक तेहरान में एक चीनी नागरिक की मौत भी हो चुकी है.

चीन ने पिछले शुक्रवार को अपने नागरिकों से ईरान छोड़ने और वहां न जाने की अपील की थी. सोमवार तक करीब 3,000 चीनी नागरिक ईरान से निकल गए.

ईरान पर शुक्रवार रात इस्राएल और अमेरिका ने हवाई हमले शुरू किए. इन हमलों के बाद ईरान ने दोनों देशों को अब तक का सबसे कड़ा सबक सिखाने का एलान किया है. ईरान, सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, ओमान, बहरीन, इस्राएल, इराक और साइप्रस पर हमले कर रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतन्याहू से फोन पर बात

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य पूर्व में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच इस्राएल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की. पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर बताया कि उन्होंने क्षेत्रीय स्थिति पर चर्चा करते हुए नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया और जल्द से जल्द शत्रुता समाप्त करने की आवश्यकता दोहराई.

यह वार्ता उस समय हुई जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खमेनेई की मौत और उसके बाद ईरान की व्यापक जवाबी कार्रवाई के कारण तनाव चरम पर पहुंच चुका है.

फोन कॉल से कुछ घंटे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की. यह बैठक राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु और पुद्दुचेरी के दौरे से उनके लौटते ही बुलाई गई. सरकारी सूत्रों के अनुसार, सीसीएस ने अमेरिका और इस्राएल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले और खमेनेई की मौत के बाद उपजे हालात की समीक्षा की. बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अन्य शीर्ष अधिकारी मौजूद थे.

चर्चाओं का मुख्य फोकस मध्य पूर्व में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और किसी भी संभावित बिगड़ते हालात के लिए तैयारियों पर था. वर्तमान में लगभग 10,000 भारतीय ईरान में, 40,000 से अधिक इस्राएल में और लगभग 90 लाख लोग पूरे पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में रहते हैं. सरकार हालात की निरंतर निगरानी कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर आपात योजनाओं को सक्रिय करने की तैयारियों में जुटी है.

कुवैत में कई अमेरिकी लड़ाकू विमान क्रैश

कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि कई अमेरिकी लड़ाकू विमान क्रैश हुए हैं. विमानों की सटीक संख्या नहीं बताई गई है, लेकिन यह कहा गया है कि सबसे पायलट सुरक्षित हैं.

इस बीच अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन ने दावा कि है कि कुवैत में अमेरिकी सेना के एक अड्डे के पास एक लड़ाकू विमान क्रैश हुआ है. सीएनएन ने फाइटर जेट के क्रैश होने वाले वीडियो की पुष्टि की. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि यह जेट किसका था.

समाचार एजेंसी एएफपी और रॉयटर्स के मुताबिक, कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास से धुआं उठ रहा है. अमेरिकी मिशन ने लोगों से अपील की है कि वे उसके परिसर से दूर रहें. अमेरिकी दूतावास ने यह नहीं बताया है कि उस पर कोई हमला हुआ या नहीं, दूतावास ने अपने बयान में बस यही कहा, "कुवैत पर मिसाइल और ड्रोन हमलों को खतरा बना हुआ है. दूतावास ना आएं."

खाड़ी में ईरान, इस्राएल और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष के तीसरे दिन भी कुवैत सिटी में लगातार सायरन गूंज रहे हैं.

खाड़ी देशों ने ईरानी हमलों की निंदा की, जवाबी कार्रवाई को अधिकार बताया

सऊदी अरब नेतृत्व वाले गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) ने ईरान के हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इन्हें "हमले" की श्रेणी में रखा है. परिषद की 50वीं आपात बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित हुई, जिसमें सभी छह सदस्य देशों-यूएई, बहरीन, सऊदी अरब, ओमान, कतर और कुवैत के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया. बैठक में बताया गया कि 28 फरवरी से शुरू हुए इन हमलों ने नागरिक ढांचों, सेवा स्थलों और आवासीय इलाकों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है.

खमेनेई की मौत ईरान की जनता के लिए बड़ा मौकाः ट्रंप

जीसीसी ने कहा कि ये हमले न केवल खाड़ी देशों की संप्रभुता का उल्लंघन हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के भी खिलाफ हैं. परिषद ने जोर देकर कहा कि सदस्य देशों की सुरक्षा "अविभाज्य" है और किसी एक देश पर हमला पूरे ब्लॉक पर हमला माना जाएगा. परिषद ने यह भी दोहराया कि उन्हें संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 51 के तहत सामूहिक आत्मरक्षा का अधिकार है और वे सुरक्षा व स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाएंगे.

बैठक में नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र की वैश्विक आर्थिक स्थिरता में अहम भूमिका का जिक्र करते हुए तनाव कम करने की अपील की. हालांकि, परिषद ने यह भी साफ कर दिया कि अगर ईरानी हमले जारी रहे तो जीसीसी अपने नागरिकों, निवासियों और क्षेत्रों की रक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई पर विचार करेगा.

ईरान के खिलाफ अपने साझेदारों की मदद करेंगे ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी

जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन के शीर्ष नेताओं ने कहा है कि मध्य पूर्व में अपने हितों की रक्षा के लिए वह कदम उठा सकते हैं. तीनों देशों ने यह एलान रविवार, 1 मार्च को मध्य पूर्व के कई देशों में ईरान के मिसाइल हमलों के बाद किया. ई-3 कहे जाने वाले इन तीनों देशों के नेताओं ने एक बयान जारी कर कहा, "हम अपने और क्षेत्र में अपने साझेदारों के हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएंगे, मुमकिन है हम स्रोतों पर मिसाइल और ड्रोन फायर करेंगे."

तीनों देशों ने अमेरिका व अन्य साझेदार देशों के साथ काम करने पर सहमति भी जताई है. इस एलान के साथ ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा है कि वह ईरान के खिलाफ आत्मरक्षा के लिए अमेरिका का ब्रिटिश सेना का अड्डा इस्तेमाल करने की अनुमति दे रहे हैं. सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर एक वीडियो पोस्ट में स्टार्मर ने कहा, "अमेरिका ने खास और सीमित सुरक्षात्मक उद्देश्य के लिए ब्रिटिश अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति मांगी है. हम इस दरख्वास्त को स्वीकार करने का फैसला किया है ताकि ईरान को इलाके में मिसाइलें फायर करने से रोका जा सके."

सऊदी अरब, यूएई, कतर और बहरीन जैसे देश यूरोपीय देशों के अहम साझेदार हैं. अमेरिकी और इस्राएली हमलों में अपने सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्लाह अली खमेनेई को खोने के बाद ईरान इस्राएल समेत इन तमाम देशों पर भी मिसाइल हमले कर रहा है. रविवार को ईरान ने मध्य पूर्व से कुछ हद तक दूर साइप्रस में भी अमेरिकी सेना के ठिकाने को निशाना बनाया.

ईरान ने कहा, अब अमेरिका से बातचीत नहीं करेंगे

ईरान के एक शीर्ष सुरक्षा अधिकारी ने अमेरिका के साथ किसी तरह की बातचीत से साफ इनकार किया है. अली लारीजानी ने सोशल नेटवर्किंग साइट एक्स पर लिखा, "हम अमेरिका के साथ बातचीत नहीं करेंगे." लारीजानी का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के दावों के बाद आया है. रविवार को ट्रंप ने संकेत दिया वह ईरान के नए नेतृत्व के साथ बात करने को तैयार हैं.

28 फरवरी को इस्राएल और अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले शुरू किए. इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्लाह अली खमेनेई समेत ईरानी सेना के कुछ वरिष्ठतम अधिकारियों की मौत हो गई. 86 साल के अली खमेनेई की मौत के बाद तेहरान ने भी सऊदी अरब, ओमान, बहरीन, यूएई, कुवैत, कतर और इराक में अमेरिकी सेना व अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर हमले किए हैं.

इस्राएल और अमेरिकी प्रतिष्ठानों पर किए जा रहे इन हमलों में कम से कम तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत भी हुई है. ट्रंप ने इन मौतों का बदला लेने का एलान किया है. सोमवार को इस्राएल और अमेरिका ने तीसरे दिन भी ईरान पर हमले जारी रखे. वहीं इन हमलों के जवाब में ईरान और उसके समर्थित गुट भी हमले कर रहे हैं.

हिज्बुल्लाह के हमले के बाद इस्राएल की जवाबी कार्रवाई, लेबनान में 31 की मौत

इस्राएल और लेबनान के बीच तनाव सोमवार को और बढ़ गया जब हिज्बुल्लाह के मिसाइल हमलों के बाद इस्राएल ने लेबनान में कई जगहों पर हवाई हमले किए. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 31 लोगों की मौत हुई और 149 घायल हुए, जिनमें से अधिकांश दक्षिणी लेबनान के थे. इस्राएल ने लगभग 50 गांवों में लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील भी की, जिससे बड़े पैमाने पर पलायन शुरू हो गया.

क्षेत्र में संघर्ष का दायरा तब और फैल गया जब अमेरिका और इस्राएल ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्ला अली खमेनेई और कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हो गई. इसके जवाब में ईरान और उसके समर्थक समूहों ने इस्राएल और खाड़ी देशों की ओर मिसाइल दागी, जबकि ईरान-समर्थित इराकी संगठनों ने भी अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमलों का दावा किया. अमेरिका ने बताया कि वह ईरान के मिसाइल ठिकानों और नौसैनिक क्षमताओं पर लगातार हमले जारी रखे हुए है.

इस बीच, खाड़ी देशों ने चेतावनी दी है कि ईरानी हमलों का जवाब दिया जा सकता है, जबकि अमेरिका ने कुवैत में अपने नागरिकों को तुरंत घरों में रहने की सलाह दी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि हालिया हमलों में अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लिया जाएगा, और सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक सभी लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते. क्षेत्रीय शक्तियों की बढ़ती सक्रियता के साथ, विशेषज्ञों का मानना है कि खमेनेई की मौत से पैदा हुए नेतृत्व संकट के कारण पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है.

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