देश की खबरें | भागलपुर पटाखा फैक्टरी विस्फोट: मृतकों के परिजनों, घायलों को मुआवजा देने का एनजीटी का आदेश खारिज

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के उस आदेश को बुधवार को खारिज कर दिया जिसके तहत भागलपुर (बिहार) के जिलाधिकारी को वहां एक पटाखा फैक्टरी में विस्फोट में मारे गए लोगों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये और घायलों को 15-15 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।

नयी दिल्ली, पांच मार्च उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के उस आदेश को बुधवार को खारिज कर दिया जिसके तहत भागलपुर (बिहार) के जिलाधिकारी को वहां एक पटाखा फैक्टरी में विस्फोट में मारे गए लोगों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये और घायलों को 15-15 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था।

न्यायमूर्ति अभय एस ओका और न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने एनजीटी के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि न तो उल्लंघनकर्ताओं को नोटिस जारी किया गया और न ही मृतकों और घायलों के परिजनों से जवाब मांगा गया।

मामले को 28 मार्च को नये सिरे से विचार के लिए एनजीटी के पास वापस भेज दिया गया।

पीठ ने एनजीटी को भागलपुर के जिलाधिकारी को नोटिस जारी करने और मृतकों एवं घायलों के परिजनों के पते मांगने का निर्देश दिया।

एनजीटी ने 27 मई 2022 के अपने आदेश में विस्फोट के दौरान 15 लोगों की मौत से जुड़ी खबर का संज्ञान लिया था और कहा था कि पटाखा फैक्टरी का संचालन पर्यावरण मानदंडों, खतरनाक रसायन का विनिर्माण, भंडारण एवं आयात नियम-1989 और विस्फोटक नियमों का उल्लंघन करते हुए किया जा रहा था।

अधिकरण ने कहा था, “हालांकि, मृतकों की उम्र और आय के बारे में आंकड़े नहीं दिए गए हैं, फिर भी न्यूनतम मुआवजा पैमाने को लागू करते हुए हम प्रत्येक मृतक के निकटतम परिजन के लिए 20 लाख रुपये और प्रत्येक घायल के लिए 15 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित करते हैं।”

एनजीटी ने भागलपुर के जिलाधिकारी को आदेश दिया था कि वह मृतकों के परिजनों और घायलों को एक महीने के भीतर मुआवजा राशि का भुगतान करें।

उसने कहा था कि राज्य कानून की उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए उल्लंघनकर्ताओं से राशि वसूलने के लिए स्वतंत्र होगा, जिनकी पहचान भी कर ली गई है।

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