जरुरी जानकारी | बंगाल सरकार आम लागों के लिये बिजली दर बढ़ाने के खिलाफ

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कोलकाता, 11 अगस्त पश्चिम बंगाल के बिजली मंत्री शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने मंगलवार को कहा कि सरकार कोरोना वायरस संकट के आम लोगों पर पड़े असर को देखते हुए बिजली दर में बढ़ोतरी कर उन पर अतिरिक्त बोझ डालने के खिलाफ है।

उन्होंने कहा कि राज्य राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा पुराने तापीय बिजली संयंत्रों के लिये निर्धारित प्रदूषण मानदंडों को पूरा करने में समस्या का सामना कर रहा है। इसका कारण इसमें लगने वाली बड़ी पूंजी राशि है।

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जो भी पूंजी व्यय होगा, उसका असर बिजली दर पर पड़ेगा।

मंत्री ने कहा, ‘‘हम बिजली दर को नहीं बढ़ा सकते क्योंकि इससे कोविड-19 महामारी से प्रभावित लोगों की समस्याएं और बढ़ेंगी...शुरूआती अनुमान के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली के लिये 1,000 करोड़ रुपये की जरूरत पड़ सकती है।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने पश्चिम बंगाल बिजली विकास निगम लि. की पांच सदस्यीय समति का गठन किया है। समिति प्रदूषण नियंत्रण प्रणाली की लागत और उसके शुल्क पर पड़ने वाले प्रभाव के बीच संतुलन बैठाएगी।’’

इससे पहले, राज्य ने पश्चिम बंगाल विद्युत नियामक आयोग से आम लोगों के हितों में बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं करने का आग्रह किया था।

सार्वजनिक क्षेत्र की पूर्वी मिदनापुर में स्थित कोलाघाट तापीय बिजलीघर तीन दशक पुराना है। इसमें एनजीटी के प्रदूषण नियंत्रण मानदंडों को पूरा करने के लिये बड़ी पूंजी राशि की जरूरत है।

चट्टोपाध्याय ने इस बात से इनकार नहीं किया कि अगर 210-210 मेगावाट क्षमता की चार इकाइयों को उन्नत करने की लागत व्यवहारिक नहीं हुई तो इसे हटाया जा सकता है। इस बिजलीघर की कुल स्थापित क्षमता 1,260 मेगावाट (210 x 6) है।

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने राज्य सरकार को नाइट्रोजन और सल्फर गैस के उत्सर्जन से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये दिसंबर, 2022 तक का समय दिया है। संयंत्र की कुल छह इकाइयां हैं।

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