देश की खबरें | बंगाल: शिक्षाविदों ने विश्वविद्यालयों में ‘संकट’ समाप्त करने के लिए राष्ट्रपति के दखल की मांग की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. पश्चिम बंगाल में कई राज्य विश्वविद्यालयों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए शिक्षाविदों के एक वर्ग ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर ‘‘संकट’’ को समाप्त करने के लिए उनके हस्तक्षेप की मांग की।

कोलकाता, 11 अगस्त पश्चिम बंगाल में कई राज्य विश्वविद्यालयों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए शिक्षाविदों के एक वर्ग ने शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर ‘‘संकट’’ को समाप्त करने के लिए उनके हस्तक्षेप की मांग की।

शिक्षाविदों का दावा है कि ऐसे हालात राज्यपाल सीवी आनंद बोस द्वारा उठाए गए कुछ कदमों के कारण पैदा हुए हैं।

लगभग 20 पूर्व कुलपतियों और वरिष्ठ प्रोफेसरों के संगठन ‘पश्चिम बंगाल एजुकेशनिस्ट फोरम’ ने मुर्मू को लिखे पत्र में कहा कि राजभवन द्वारा ‘सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को सीधे प्रशासित करने’ के कदमों के कारण राज्य विश्वविद्यालयों में ‘एक समानांतर प्रशासन’ चल रहा है।

फोरम ने राष्ट्रपति से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि राज्यपाल विश्वविद्यालय के ‘कार्यों, कानूनों और नियमों का सम्मान करें।’

यादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ओमप्रकाश मिश्रा ने कहा कि राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की गई है और भले ही उनके पास ‘विशेष विवेकाधीन शक्तियां’ हों, लेकिन वह संविधान द्वारा निर्धारित सुपरिभाषित सीमाओं का उल्लंघन नहीं कर सकते।

एक उदाहरण देते हुए, उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति मिश्रा ने कहा कि राज्यपाल विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक और शैक्षणिक कामकाज से संबंधित विधेयकों को राज्य विधानसभा द्वारा पारित किए जाने के बावजूद दबाए बैठे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘वह या तो विधेयक पर हस्ताक्षर कर सकते थे या इसे खारिज कर सकते थे। राज्यपाल के पास विवेकाधीन शक्तियां होती हैं। लेकिन जवाब न देकर वह गतिरोध को लंबा खींच रहे हैं।’’

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