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देश की खबरें | नए संसद भवन के औपचारिक उद्घाटन से पहले सुबह हवन और विभिन्न धर्मों की प्रार्थना होगी

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देश की खबरें | नए संसद भवन के औपचारिक उद्घाटन से पहले सुबह हवन और विभिन्न धर्मों की प्रार्थना होगी

नयी दिल्ली, 25 मई नए संसद भवन का उद्घाटन समारोह रविवार को सुबह हवन और विभिन्न धर्मों की प्रार्थना के साथ शुरू होगा जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा कक्ष में औपचारिक उद्घाटन करेंगे।

अधिकारियों ने कहा कि सुबह करीब सात बजे नए भवन के बाहर संसद परिसर में हवन होगा जहां शैव संप्रदाय के महायाजक औपचारिक राजदंड ‘सेंगोल’ मोदी को सौंपेंगे।

सेंगोल को नए संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास स्थापित किया जाएगा।

नए संसद भवन के उद्घाटन का मुख्य समारोह रविवार दोपहर प्रधानमंत्री, पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और अन्य की उपस्थिति में शुरू होने की संभावना है।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष शिवराज पाटिल, कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे तथा विपक्षी दलों के नेताओं को भी निमंत्रण दिया गया है।

कम से कम 21 विपक्षी दलों ने उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने की घोषणा की है, जबकि रविवार के कार्यक्रम में 25 दल सम्मिलित होंगे जिनमें राजग के 18 घटक और सात गैर-राजग दल शामिल हैं।

त्रिकोणीय आकार के चार मंजिला संसद भवन का निर्मित क्षेत्र 64,500 वर्ग मीटर है। भवन के तीन मुख्य द्वार हैं- ज्ञान द्वार, शक्ति द्वार और कर्म द्वार।

संसद का वर्तमान भवन 1927 में बनकर तैयार हुआ था, और अब यह 96 साल पुराना है। पुरानी इमारत वर्तमान समय की आवश्यकताओं के लिए अपर्याप्त पाई गई थी।

टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा निर्मित नए संसद भवन में भारत की लोकतांत्रिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए एक भव्य संविधान हॉल, संसद सदस्यों के लिए एक लाउंज, एक पुस्तकालय, कई समिति कक्ष, भोजन क्षेत्र और पर्याप्त पार्किंग स्थल होगा।

मौजूदा भवन ने स्वतंत्र भारत की पहली संसद के रूप में कार्य किया और यह संविधान को अपनाने का साक्षी भी बना।

मूल रूप से ‘काउंसिल हाउस’ कहे जाने वाले इस भवन में ‘इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल’ स्थित थी। अधिक जगह की आवश्यकता को पूरा करने के लिए 1956 में संसद भवन में दो मंजिलों को जोड़ा गया था।

भारत की 2,500 वर्षों की समृद्ध लोकतांत्रिक विरासत को प्रदर्शित करने के लिए इसमें 2006 में संसद संग्रहालय शामिल किया गया था।

अधिकारियों ने कहा कि वर्तमान भवन को कभी भी द्विसदनीय विधायिका को समायोजित करने के लिहाज से डिज़ाइन नहीं किया गया था और बैठने की व्यवस्था तंग एवं बोझिल थी, तथा दूसरी पंक्ति के बाद कोई डेस्क नहीं था।

मौजूदा भवन में सेंट्रल हॉल में केवल 440 व्यक्तियों के बैठने की क्षमता है और दोनों सदनों की संयुक्त बैठक के दौरान अधिक जगह की आवश्यकता महसूस की गई थी।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 25, 2023 09:24 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).