स्वतंत्र रूप से वकालत करने वाले वकीलों के लिये बीसीआई आपात कोष बनाने पर विचार कर सकती है: न्यायालय
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नयी दिल्ली, 30 अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोविड-19 की वजह से लॉकडाउन के दौरान कठिनाइयों का सामना कर रहे स्वतंत्र रूप से वकालत करने वाले वकीलों की आर्थिक मदद के लिये बार काउन्सिल ऑफ इंडिया आपात कोष बनाने पर विचार कर सकती है।

न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने इस संबंध में दायर याचिका पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान कहा कि जब पूरा देश कठिनाई का सामना कर रहा है, तो ऐसे समय में वह कोई कोष बनाने और वकीलों के लिये एक विशेष श्रेणी तैयार करने के बारे में निर्देश नहीं दे सकती।

पीठ ने कहा कि कुछ राज्यों की बार काउन्सिल ने इस विषय पर गौर किया है और उन्होंने स्वतंत्र रूप से वकालत कर रहे वकीलों की मदद करने का निर्णय लिया है।

पीठ ने याचिकाकर्ता वकील पवन प्रकाश पाठक से कहा, ‘‘इस बारे में तो बार काउन्सिल ऑफ इंडिया को विचार करना चाहिए।’’ इसके साथ ही पीठ ने कोविड-19 का जिक्र करते हुये कहा कि पूरा देश इससे जूझ रहा है और वकील भी इसका ही हिस्सा हैं।

पाठक ने एक अन्य अधिवक्ता आलोक सिंह के साथ दायर इस याचिका में अधिवक्ता कानून के प्रावधान का हवाला देते हुये कहा था कि वकीलों के हितों और अधिकारों की रक्षा करना बार काउन्सिल ऑफ इंडिया की जिम्मेदारी है।

उन्होंने यह भी दलील दी कि न्यायालय इस संबंध में बार काउन्सिल ऑफ इंडिया को कार्रवाई करने का निर्देश दे सकता है।

अनूप

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