जरुरी जानकारी | बैंकों ने 2019-20 में रेपो दर में कटौती का लाभ ग्राहकों को अधिक तेजी से दिया : रिजर्व बैंक

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. बीते वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान रेपो दर में बदलाव के जवाब में बैंकों की जमा और ऋण दरों में बेहतर समायोजन देखने को मिला। विशेषरूप से साल की दूसरी छमाही में इसमें अधिक सुधार आया। रिजर्व बैंक की 2019-20 की वार्षिक रिपोर्ट में यह कहा गया है।

मुंबई, 25 अगस्त बीते वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान रेपो दर में बदलाव के जवाब में बैंकों की जमा और ऋण दरों में बेहतर समायोजन देखने को मिला। विशेषरूप से साल की दूसरी छमाही में इसमें अधिक सुधार आया। रिजर्व बैंक की 2019-20 की वार्षिक रिपोर्ट में यह कहा गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर, 2019 से कुछ क्षेत्रों मसलन व्यक्तिगत, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमों (एमएसएमई) को नए कर्ज पर ब्याज दरों को बाहरी मानकों से जोड़ने को अनिवार्य किया गया । इसकी वजह से ऐसा हो पाया है।

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बाहरी बेंचमार्क नीतिगत रेपो दर, तीन माह, छह माह के टी-बिल या भारतीय वित्तीय बेंचमार्क्स (एफबीआईएल) द्वारा प्रकाशित कोई अन्य बेंचमार्क हो सकती है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर, 2019 से जून, 2020 के दौरान घरेलू बैंकों (सार्वजनिक और निजी क्षेत्र) के रुपये में आवास ऋण की ब्याज दर में औसतन 1.04 प्रतिशत की गिरावट आई। वहीं वाहन ऋण पर इसमें 1.02 प्रतिशत, व्यक्तिगत ऋण में 1.15 प्रतिशत तथा एमएसएमई को ऋण में 1.98 प्रतिशत की कमी आई।

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रिजर्व बैंक ने कहा कि ऋण पर ब्याज के लिए बाहरी बेंचमार्क प्रणाली को लागू किए जाने के बाद 66 में 36 बैंकों ने खुदरा और एमएसएमई क्षेत्र को फ्लोटिंग दरों वाले ऋण के लिए नीतिगत रेपो को बाहरी बेंचमार्क के रूप में अपनाया। वहीं सात बैंकों ने क्षेत्र आधारित बेंचमार्क को लागू किया।

मौद्रिक नीति समिति फरवरी, 2019 से कुल मिलाकर मुख्य लघु अवधि की ऋण दर (रेपो) में 2.5 प्रतिशत की कटौती कर चुकी है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी, 2019 से शुरू हुए रेपो दर में कटौती के चक्र के दौरान रुपये में नए ऋण पर निजी क्षेत्र के बैंकों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तुलना में ग्राहकों को दरों में कटौती का अधिक लाभ स्थानांतरित किया।

जून, 2018 से जनवरी, 2019 के दौरान दरों में बढ़ोतरी के चक्र के दौरान भी निजी क्षेत्र के बैंक इसका स्थानांतरण करने में आगे रहे थे।

नए कर्ज में निजी क्षेत्र के बैंकों की भारित औसत ऋण दर (डब्ल्यूएएलआर) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से अधिक रहता है, जो कोष की ऊंची लागत को दर्शाता है।

अजय

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