देश की खबरें | स्वस्थ जीवनशैली के लिए संतुलित आहार आवश्यक : उत्तर प्रदेश की राज्यपाल

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लखनऊ, चार फरवरी उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को कहा कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए संतुलित आहार आवश्यक है।

राजभवन द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पटेल की प्रेरणा से मंगलवार को राजभवन में ‘श्री अन्न‘ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा, “स्वस्थ जीवनशैली के लिए संतुलित आहार आवश्यक है और इस तरह की प्रतियोगिताएं मोटा अनाज जैसे पारंपरिक अनाजों को आहार में पुनः शामिल करने के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम हैं।”

प्रतियोगिता में विभिन्न विश्वविद्यालयों और राजभवन के प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

प्रतियोगिता को वृद्धावस्था, बाल्यावस्था और गर्भावस्था इन तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया था।

प्रतिभागियों को इन वर्गों के अनुसार मिलेट आधारित पौष्टिक और संतुलित आहार तैयार करने का अवसर दिया गया।

राज्यपाल ने प्रतियोगिता के दौरान सभी प्रतिभागियों से संवाद किया, उनके द्वारा तैयार किए गए व्यंजनों का अवलोकन किया तथा उनके पोषक तत्वों की जानकारी ली।

राज्यपाल ने कहा, “बाल्यावस्था, गर्भावस्था और वृद्धावस्था इन तीनों अवस्थाओं में पोषण की अलग-अलग आवश्यकताएं होती हैं, जिन्हें समझना और उसके अनुसार आहार निर्धारित करना आवश्यक है।”

उन्होंने कहा “विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं को इस विषय पर जागरूक किया जाना चाहिए ताकि वे न केवल अपने परिवार में बल्कि समाज में भी इस ज्ञान का प्रसार कर सकें।”

पटेल ने यह भी बताया, “गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को आयरन, फोलिक एसिड और कैल्शियम से भरपूर आहार लेना चाहिए जबकि बच्चों के लिए प्रोटीन और ऊर्जा युक्त भोजन तथा वृद्धजनों के लिए हल्का, सुपाच्य और पोषक तत्वों से युक्त भोजन आवश्यक होता है।”

राज्यपाल ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों में ‘चाइल्ड साइकोलॉजी’ (बाल मनोविज्ञान) को भी पढ़ाया जाना चाहिए, जिससे छात्राओं को बाल विकास और उनके पोषण संबंधी आवश्यकताओं की गहरी समझ मिल सके।

उन्होंने इस विषय पर संवाद, परिचर्चा और पेंटिंग प्रतियोगिता जैसे आयोजनों की भी आवश्यकता पर बल दिया, ताकि युवा पीढ़ी में इस विषय को लेकर रुचि और जागरूकता उत्पन्न हो।

राज्यपाल ने कहा, “इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य केवल भोजन बनाना नहीं था, बल्कि यह समझ विकसित करना था कि विभिन्न जीवन अवस्थाओं में पोषण किस प्रकार प्रभावी भूमिका निभाता है।”

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