देश की खबरें | भाकियू, सपा और कांग्रेस ने किया किसान विधेयकों के खिलाफ जगह—जगह प्रदर्शन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. संसद में पारित किसान विधेयकों के विरोध में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में कृषक संगठन भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) और विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने जगह—जगह प्रदर्शन किया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

लखनऊ, 25 सितम्बर संसद में पारित किसान विधेयकों के विरोध में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में कृषक संगठन भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) और विपक्षी दलों समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने जगह—जगह प्रदर्शन किया।

सपा ने जहां राज्य के सभी जिलों में जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को ज्ञापन सौंपकर उनसे इन विधेयकों को वापस लेने और इन्हें राज्य में न लागू करने देने की मांग की, वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अनेक स्थानों पर धरना—प्रदर्शन किया। इसके अलावा भाकियू ने भी कई स्थानों पर प्रदर्शन करके विधेयकों को वापस लेने की मांग की।

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सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर राज्य के सभी जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं ने किसानों एवं श्रमिकों के हितों को चोट पहुंचाने वाले हालिया पारित कृषि एवं श्रम कानूनों के विरोध में जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को सम्बोधित ज्ञापन सौंपा।

उन्होंने कहा कि इसके साथ ही इन कानूनों को वापस लेने तथा उनसे प्रदेश में इन कानूनों को लागू न करने का निर्देश देने का आग्रह किया।

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सपा अध्यक्ष अखिलेश ने एक बयान में कहा कि समाजवादी लोग जनहित के मुद्दों को उठाने में हमेशा आगे रहे हैं। सत्तादल के दमन का विरोध हमेशा समाजवादियों ने ही किया है।

अखिलेश ने कहा कि युवा बेरोजगार है, किसान की जमीन पर बड़े-बड़े पूंजीपतियों की नज़र है। संसद में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और चंद उद्योगपतियों के लिए ही कानून बन रहे हैं। भाजपा सरकार अपने चंदा देने वाले पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए पहले किसानों के शोषण का विधेयक लायी और अब अपने उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए श्रमिक शोषण का एकतरफा विधेयक लायी है।

कांग्रेस ने भी हाल में संसद के मॉनसून सत्र के दौरान पारित किसान विधेयकों को 'किसान विरोधी' करार देते हुए राज्य के विभिन्न जिलों में शुरू किये गये कृषक आंदोलन को समर्थन दिया।

नोएडा के सेक्टर 14ए में दिल्ली की सीमा पर भाकियू के बैनर तले बड़ी संख्या में काश्तकारों ने किसान विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्हें दिल्ली की तरफ कूच करने से रोकने के लिये व्यापक पुलिस बल तैनात किया गया।

भाकियू के मेरठ जोन के अध्यक्ष पवन खटाना ने बताया कि आज का प्रदर्शन संसद में पारित किसान विरोधी विधेयकों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी मुहिम का हिस्सा है। हमारी मांग है कि सरकार एक ऐसा कानून बनाये जिससे न्यूनतम समर्थन मूल्य को हर हाल में फसल के सबसे कम मूल्य का दर्जा मिल सके।

पैदल, दोपहिया वाहनों और ट्रैक्टर—ट्रॉलियों से आये किसानों ने इस प्रदर्शन के दौरान 'पंचायत' भी की जिसे अनेक क्षेत्रीय किसान नेताओं और भाकियू पदाधिकारियों ने सम्बोधित किया। इस प्रदर्शन के कारण नोएडा—दिल्ली मार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ।

प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज में भी सपा, कांग्रेस और भाकियू ने किसान विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए सरकार से इन्हें वापस लेने की मांग की।

गोरखपुर में भाकियू और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस ने जुलूस निकालते हुए कलेक्ट्रेट जाने की कोशिश कर रहे कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नगर निगम गेट पर रोक लिया।

देवरिया में भाकियू, सपा और वाम दलों ने प्रदर्शन किया। वहीं, महराजगंज में प्रदर्शनकारियों ने फरेंदा तहसील स्थित आनंदनगर चीनी मिल से विष्णु मंदिर चौराहे तक पदयात्रा की और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा।

जालौन में भाकियू के बैनर तले किसानों ने झांसी—कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के आटा टोल प्लाज के पास उकासा मोड़ पर रास्ता जाम कर दिया। किसानों ने संसद द्वारा पारित कृषि विधेयकों को वापस लेने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी प्रमिल कुमार को सौंपा। वहीं, कांग्रेस के कार्यकर्ता भी धरना दे रहे किसानों के समर्थन में पहुंचे।

इस दौरान आवागमन बाधित होने से दोनों ओर वाहनों की लम्बी कतारें लग गयीं। करीब 30 मिनट तक रास्ता जाम रहा। धरना खत्म होने के बाद पुलिस ने जाम खुलवाया।

इस बीच प्रदेश के हापुड़ में कृषि विधेयकों के विरोध में राष्ट्रीय आह्वान पर किसान संगठनों व रालोद ने हाइवे तथा तहसील चौपाल पर प्रदर्शन किया और यातायात अवरूद्ध कर दिया।

अंतिम समाचार मिलने तक किसान बाबूगढ़ के पास काली नदी पुल पर जाम लगाकर धरने पर बैठे हुए थे।

इस दौरान किसान नेता तथा नानक चंद शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने कृषि विधेयकों में किसानों के हितों का नहीं बल्कि उद्योगपतियों को ध्यान रखा है। किसानों को इससे कोई लाभ नहीं मिलेगा बल्कि उनकी मुसीबत बढ़ेगी।

टीम सलीम

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