देश की खबरें | बघेल ने सीजेआई को पत्र लिखकर राज्य में केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के कामकाज की जांच की मांग की
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रायपुर, 24 सितंबर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्षी दल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने प्रधान न्यायाधीश डी वाई च्रदंचूड़ से राज्य में केंद्रीय और राज्य जांच एजेंसियों के कामकाज की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच का आदेश देने का अनुरोध किया है।
बघेल ने प्रधान न्यायाधीश को लिखे पत्र में शिकायत की है कि राज्य में विभिन्न अपराधों से जोड़ने के लिए उनके खिलाफ साजिश रची जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय राज्य में पिछली बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान सामने आए कोयला लेवी और महादेव ऐप घोटालों की जांच कर रहा है। पिछले साल विधानसभा चुनाव में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो,आर्थिक अपराध शाखा (एसीबी,ईओडब्ल्यू) ने दोनों कथित घोटालों में एक अलग मामला दर्ज किया था। ईओडब्ल्यू की प्राथमिकी में आरोपी के रूप में नामित 18 लोगों में बघेल भी शामिल हैं। राज्य सरकार ने पिछले महीने महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप 'घोटाले' के संबंध में दर्ज मामलों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच की सिफारिश की थी।
इस महीने की 21 तारीख को लिए गए पत्र में बघेल ने कहा है कि उन्होंने 17 दिसंबर 2018 से तीन दिसंबर 2023 तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया और इस अवधि के दौरान उन्होंने अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, निष्ठा और गरिमा के साथ किया तथा सर्वोच्च संवैधानिक मर्यादाओं का पूर्ण पालन किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है, ''छत्तीसगढ़ राज्य में कोयला परिवहन में कथित अवैध वसूली के एक प्रकरण की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा विगत चार वर्षों से की जा रही है। राज्य में पिछले नवंबर में हुए चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ। इसके बाद राज्य की एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा भी एक प्रकरण दर्ज किया गया। ईडी की ओर से गिरफ्तार किए गए विचाराधीन बंदियों को हिरासत में लेकर एसीबी/ईओडब्ल्यू ने नए प्रकरण में जेल में निरुद्ध कर रखा है।''
उन्होंने लिखा है, ''इन अभियुक्तों में से एक सूर्यकांत तिवारी नाम के व्यापारी भी हैं। सूर्यकांत तिवारी ने नौ सितंबर 2024 को माननीय चतुर्थ जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) के समक्ष एक आवेदन पेश किया है। इस आवेदन के अनुसार रविवार आठ सितंबर को एसीबी/ईओडब्ल्यू के निदेशक आईपीएस अमरेश कुमार मिश्रा जेल पहुंचे और उन्होंने सूर्यकांत तिवारी को बुलाकर उनसे मुलाकात की। इस मुलाक़ात के दौरान आईपीएस मिश्रा ने तिवारी से कहा कि वे कोयला परिवहन के कथित अपराध में मेरी (भूपेश बघेल) की संलिप्तता स्वीकार करें और मुझे लाभार्थी बताते हुए बयान दर्ज करवाएं।''
बघेल ने लिखा है, ''जैसा कि तिवारी ने अपने आवेदन में लिखा है, इस दौरान आईपीएस अधिकारी मिश्रा ने उनके साथ अभद्रता भी की और मेरा नाम न लिए जाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।''
पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा है कि सूर्यकांत तिवारी इस समय न्यायिक हिरासत में हैं। उनके आवेदन के अनुसार इस मुलाकात के लिए न तो संबंधित न्यायालय से और न किसी सक्षम अधिकारी से अनुमति ली गई।
बघेल ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को लिखा है, ''महोदय, मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि यह पूरी प्रक्रिया न केवल विधि के आधारभूत सिद्धांतों के विपरीत है बल्कि यह पूर्वाग्रहों से भरी एक सुनियोजित साजिश है। इस साजिश का उद्देश्य मेरा नाम किसी भी तरह एक अपराध से जोड़ना है। और एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ऐसे अपराध कारित कर गंभीरतम षड़यंत्र कर रहे हैं।''
भूपेश बघेल ने अपने पत्र में उनके मुख्यमंत्री रहने के कार्यकाल के दौरान हुई कुछ घटनाओं का भी उल्लेख किया है।
उन्होंने पत्र में लिखा है, ''इस पत्र के माध्यम से मैं आपके संज्ञान में कुछ और बातें लाना चाहता हूं, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि मेरा नाम किसी भी तरह से अपराधों से जोड़ने की कोशिशों का यह अकेला प्रकरण नहीं है। इससे पहले भी जांच एजेंसियों के माध्यम से मेरा नाम किसी न किसी अपराध से जोड़ने की साजिशें और कोशिशें की जा चुकी हैं। प्रत्येक प्रकरण में अनेकों व्यक्तियों को डरा धमका कर ऐसा प्रयास लगातार किया जा रहा है।''
बघेल ने लिखा है, ''कोयला परिवहन में कथित अवैध वसूली का प्रकरण राज्य में नवंबर, 2023 में हुए चुनाव के पहले दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में जो गिरफ्तारियां हुईं उसके अतिरिक्त जिन लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, उनको ईडी ने शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और यह दबाव बनाया कि वे इस अपराध में किसी भी तरह मेरी (भूपेश बघेल) संलिप्तता का बयान दें। इन व्यक्तियों में कुछ तो प्रदेश के प्रतिष्ठित व्यवसायी व उद्योगपति थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा है, ''मेरे मुख्यमंत्रित्व काल में 'महादेव ऐप के नाम से संचालित अवैध ऑनलाइन सट्टा व्यवसाय के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई। मेरी सरकार ने महादेव ऐप से माध्यम से ऑनलाइन सट्टा कारोबार चलाने वाले लोगों के खिलाफ 72 प्रकरण दर्ज किए। सैकड़ों बैंक खाते सील किए गए और करोड़ों की राशि जब्त की गई। मेरी ही सरकार ने महादेव ऐप के संचालकों के खिलाफ लुक-आउट नोटिस जारी किया और केंद्र सरकार से गुहार लगाई कि चूंकि ये अपराधी विदेश भाग गए हैं इसलिए केंद्र सरकार उन्हें गिरफ्तार कर भारत लाने की कार्रवाई करे। परंतु केन्द्र सरकार ने कोई कार्रवाई न करके इसे राजनीतिक रंग दिया।''
बघेल ने आरोप लगाया कि इस मामले में ईडी ने चुन चुन कर उनके करीबी लोगों पर छापे की कार्रवाई की थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा है, ''इन घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि हाल ही में रायपुर सेंट्रल जेल में सूर्यकांत तिवारी के साथ जो घटना घटी और पहले जो घटनाएं घटी उन सबका उद्देश्य सिर्फ़ मुझे बदनाम करके राजनीतिक लाभ उठाने का था। मेरी बदनामी से किसे लाभ पहुंचने वाला था या किसे लाभ पहुंचने वाला है यह किसी से छिपा नहीं है।''
बघेल ने लिखा है, ''दुर्भाग्य की बात है कि चुनाव के बाद भी यह षड्यंत्र रुक नहीं रहे हैं और अब मुझे राज्य की एजेंसी एसीबी/ईओडब्ल्यू भी किसी भी तरह से धनशोधन के मामलों से जोड़ने के राजनीतिक षड़यंत्र में भागीदार बन गई है।
उन्होंने लिखा है कि वह 1993 से छह बार विधायक रह चुके हैं। 2018 में मुख्यमंत्री नियुक्त होने के बाद उन्होंने संविधान का पूरी तरह से पालन किया।
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