देश की खबरें | असम के नेता प्रतिपक्ष ने महाधिवक्ता के बीसीसीआई सचिव की भूमिका निभाने पर सीजेआई को पत्र लिखा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. असम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया ने प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि राज्य के महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया ने बीसीसीआई के कार्यवाहक सचिव और आईसीसी निदेशक की भूमिका निभाकर संविधान का उल्लंघन किया है।

गुवाहाटी, 21 दिसंबर असम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देबब्रत सैकिया ने प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि राज्य के महाधिवक्ता देवजीत लोन सैकिया ने बीसीसीआई के कार्यवाहक सचिव और आईसीसी निदेशक की भूमिका निभाकर संविधान का उल्लंघन किया है।

नेता प्रतिपक्ष ने बृहस्पतिवार को सीजेआई को भेजे गए पत्र में दावा किया कि महाधिवक्ता ने ‘‘मानदंडों और नियमों के विपरीत लाभ का पद/आर्थिक लाभ के पद’’ लेकर अपने पद के विशेषाधिकारों और कर्तव्यों का उल्लंघन किया है।’’

हालांकि, महाधिवक्ता ने कहा कि ‘लाभ के पद’ का कोई सवाल ही नहीं है क्योंकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) में दोनों पद मानद प्रकृति के हैं।

कांग्रेस विधायक के पत्र की एक प्रति असम के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव तथा भारतीय विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष को भी भेजी गई।

उन्होंने कहा कि देवजीत लोन सैकिया 21 मई, 2021 को राज्य के महाधिवक्ता नियुक्त किए गए थे और उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत नियमों के प्रति निष्ठा एवं अनुपालना की शपथ ली थी।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि महाधिवक्ता को इस साल 12 दिसंबर को बीसीसीआई के कार्यवाहक सचिव के रूप में नियुक्त किया गया था और वह सितंबर 2025 तक इस भूमिका में बने रहेंगे, जब रिक्त पद स्थायी रूप से भरा जाना है।

कांग्रेस विधायक ने कहा कि बीसीसीआई के सचिव के रूप में पद के कारण सैकिया को आईसीसी के निदेशक के रूप में भी नियुक्त किया गया था।

उन्होंने दावा किया कि सैकिया ने ऐसा करके संविधान का उल्लंघन किया है।

कांग्रेस नेता ने सीजेआई को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘‘मैं प्रार्थना करता हूं कि कृपया इस मामले को अत्यधिक महत्व दें और इसे असम सरकार में एक संवैधानिक पदाधिकारी द्वारा विशेषाधिकारों का गंभीर उल्लंघन किए जाने के रूप में देखें तथा तदनुसार मामले पर जल्द से जल्द कार्रवाई करें।’’

वहीं, महाधिवक्ता ने आरोपों के जवाब में कहा कि ‘लाभ के पद’ का कोई सवाल ही नहीं है क्योंकि बीसीसीआई और आईसीसी में दोनों पद मानद प्रकृति के हैं।

महाधिवक्ता ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘अगर नेता प्रतिपक्ष के पास कानूनी ज्ञान की कमी है, तो मुझे उन पर दया आती है। वह विधानसभा में इतने ऊंचे पद पर हैं। नेता प्रतिपक्ष को पता होना चाहिए कि लाभ का पद क्या है।’’

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