देश की खबरें | असम : विपक्ष ने राष्ट्रपति से सीएए रद्द करने का आग्रह किया, लागू करने पर आंदोलन की चेतावनी दी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. असम में विपक्षी दलों ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को रद्द करने के लिए बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप करने की मांग की और कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे राज्य भर में 'लोकतांत्रिक जन आंदोलन' करेंगे।
गुवाहाटी, 29 फरवरी असम में विपक्षी दलों ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को रद्द करने के लिए बृहस्पतिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हस्तक्षेप करने की मांग की और कहा कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे राज्य भर में 'लोकतांत्रिक जन आंदोलन' करेंगे।
सोलह दलों वाले संयुक्त विपक्षी मंच असम (यूओएफए) ने मुर्मू को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा।
यूओएफए ने कहा, ''यह अधिनियम न केवल असंवैधानिक है बल्कि यह इतिहास, संस्कृति, सामाजिक ताने-बाने, अर्थव्यवस्था और असमिया लोगों की पहचान को खतरे में डालकर 1985 के ऐतिहासिक असम समझौते को भी रद्द करने वाला है।''
यूओएफए ने राष्ट्रपति से मामले में हस्तक्षेप करने और केंद्र को असम में नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 को लागू करने के अपने फैसले से बचने व इस 'असंवैधानिक और राष्ट्र-विरोधी' अधिनियम को रद्द करने का निर्देश देने का आग्रह किया।
ज्ञापन में कहा गया, ''हम आपको सूचित करते हैं कि अगर भारत सरकार इन मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो हम विपक्षी राजनीतिक दलों और असम के लोगों के पास सरकार को मजबूर करने के लिए लोकतांत्रिक जन आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।''
यूओएफए में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), आम आदमी पार्टी (आप), रायजोर दल, एजेपी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक (एआईएफबी), शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (शिवसेना-यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरद चंद्र पवार(राकांपा-शरद पवार), समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसी पार्टियां शामिल हैं।
यूओएफए ने बुधवार को घोषणा की थी कि इस विवादास्पद अधिनियम के लागू होने के अगले ही दिन राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया जाएगा, जिसके बाद जनता भवन (सचिवालय) का 'घेराव' किया जाएगा।
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