देश की खबरें | असम सरकार को कुछ और बेहतर करना चाहिए: गोमांस मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने गोमांस परिवहन के आरोपी एक व्यक्ति के खिलाफ मामले की सुनवाई करते हुए शुक्रवार को असम सरकार की खिंचाई की और कहा कि उसे ऐसे लोगों के पीछे भागने के बजाय ‘‘कुछ और बेहतर काम करने चाहिए।’’

नयी दिल्ली, 21 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने गोमांस परिवहन के आरोपी एक व्यक्ति के खिलाफ मामले की सुनवाई करते हुए शुक्रवार को असम सरकार की खिंचाई की और कहा कि उसे ऐसे लोगों के पीछे भागने के बजाय ‘‘कुछ और बेहतर काम करने चाहिए।’’

न्यायमूर्ति ए एस ओका और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी और मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल के लिए निर्धारित कर दी।

पीठ ने राज्य सरकार द्वारा मांस के नमूने परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे जाने की जानकारी दिए जाने के बाद कहा, ‘‘राज्य सरकार को इन लोगों के पीछे भागने के बजाय कुछ बेहतर काम करने चाहिए।’’

वकील ने कहा कि वाहन रोके जाने के बाद चालक वास्तविक उत्पाद की प्रकृति के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देने में असमर्थ था।

उन्होंने कहा, ‘‘इसके बाद मांस को फॉरेंसिक प्रयोगशाला में भेज दिया गया।’’

अदालत ने कहा कि जिस व्यक्ति को विशेषज्ञ जानकारी नहीं है, वह केवल देखकर संबंधित चीजों में अंतर नहीं कर सकता।

इसने कहा, ‘‘कोई व्यक्ति कैसे जान पाएगा कि यह गोमांस है या कोई अन्य मांस? यदि किसी व्यक्ति के पास यह है तो वह कैसे पहचान पाएगा कि यह किस पशु का मांस है?’’

आरोपी के वकील ने दलील दी कि उनका मुवक्किल एक गोदाम का मालिक है और उसने केवल पैक किया हुआ कच्चा मांस ही परिवहन किया था।

असम मवेशी संरक्षण अधिनियम की धारा 8 का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यह प्रावधान तभी लागू किया जा सकता है जब आरोपी को पता हो कि बेचा जा रहा मांस गोमांस है।

राज्य सरकार के वकील ने दलील दी कि आरोपी मांस की पैकेजिंग और बिक्री में शामिल था।

पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई जरूरी है और इसे अप्रैल में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाता है।

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